चंदेरिया लेड जिंक सेमल्टर ठेका श्रमिक संघ का रविवार को औपचारिक रूप से रजिस्ट्रेशन किया गया। रजिस्ट्रेशन के बाद भारतीय मजदूर संघ की एक आमसभा आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूर शामिल हुए। आमसभा में यह साफ किया गया कि जल्द ही संघ की कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा, ताकि संगठन को मजबूत बनाकर मजदूरों की आवाज को एकजुट रूप से उठाया जा सके। सभा में मौजूद नेताओं और श्रमिकों ने कहा कि सालों से चुनाव न होना लोकतंत्र के खिलाफ है और अब हिंदुस्तान जिंक में पारदर्शी यूनियन चुनाव करवाना जरूरी हो गया है। बेगूं विधायक सुरेश धाकड़ ने बीएमएस स्थापना को बताया सपना आमसभा को संबोधित करते हुए बेगूं विधायक सुरेश धाकड़ ने कहा कि जिंक में भारतीय मजदूर संघ(भामस) की स्थापना उनका पुराना सपना रहा है, जो अब साकार होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के केंद्र में और राजस्थान राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, ऐसे में जिंक में भारतीय मजदूर संघ की स्थापना होना स्वाभाविक है। धाकड़ ने कहा कि मजदूरों के हित में काम करने के लिए मजबूत संगठन की जरूरत होती है और अब आने वाले दिनों में मजदूरों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संगठन बनने के बाद मजदूरों की समस्याएं खुलकर सामने आएंगी और उनके समाधान के लिए ठोस कोशिश किए जाएंगे। यूनियन व्यवस्था समझाते हुए जिंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए सुरेश धाकड़ ने यूनियन व्यवस्था को समझाते हुए कहा कि रावतभाटा जैसे क्षेत्रों में एक से ज्यादा यूनियन होती हैं, जैसे भारतीय मजदूर संघ, सीटू और इंटक। ठीक उसी तरह जैसे राजनीति में अलग-अलग दल होते हैं, वैसे ही यूनियन में भी अलग-अलग संगठन होते हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर हर जगह मैनेजमेंट चुनाव करवाता है और जो जीतता है वही यूनियन कार्यालय संभालता है। लेकिन जिंक में लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया है और एक ही व्यक्ति को सालों से सर्वेसर्वा बनाकर रखा गया है। एक बार यूनियन बनने के बाद कभी चुनाव नहीं करवाए गए, जो पूरी तरह गलत है। खुले मंच से चुनाव की चुनौती, जीत हार दोनों स्वीकारने की घोषणा विधायक धाकड़ ने मंच से साफ शब्दों में कहा कि वे चुनाव करवाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वोटिंग करवाई जाए और जो भी चुनाव लड़े, उसे मौका दिया जाए। अगर भारतीय मजदूर संघ जीतता है तो उनका प्रतिनिधि यूनियन कार्यालय संभालेगा और अगर हार होती है तो वे उसे स्वीकार करेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि जो भी जीतेगा, उसे माला पहनाकर खुद कुर्सी पर बैठाया जाएगा। उनका कहना था कि पारदर्शी चुनाव ही मजदूरों का सही प्रतिनिधि तय कर सकता है और यही लोकतंत्र की असली पहचान है। ठेका और स्थानीय मजदूरों को काम देने की मांग पर हुंकार सुरेश धाकड़ ने कहा कि जिंक यहां चलना चाहिए, लेकिन ठेके और काम स्थानीय लोगों को मिलने चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो जिंक में ताला लगाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। उन्होंने 15 मार्च को यूनियन चुनाव करवाने की मांग रखी और कहा कि मजदूर अब और इंतजार नहीं करेंगे। उनका कहना था कि बाहर के लोग यहां आकर काम करके चले जाते हैं, जबकि स्थानीय मजदूर बेरोजगार रहते हैं, जो किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधायक चंद्रभान आक्या ने इंटक की मोनोपोली पर हमला बोला चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिंक में लंबे समय से इंटक की कार्यकारिणी बनी हुई है और उनकी एकतरफा मोनोपोली चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से मजदूरों का शोषण हो रहा है और उनकी आवाज दबाई जा रही है। आक्या ने कहा कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार है, साथ ही क्षेत्र के सांसद और विधायक भी भाजपा से हैं। ऐसे में मजदूरों की इच्छा है कि यहां भारतीय मजदूर संघ की स्थापना हो और उनकी विचारधारा आगे बढ़े। गेट पास, स्थानीय रोजगार और लंबी लड़ाई का भरोसा दिया विधायक आक्या ने आरोप लगाया कि इंटक यूनियन लगातार मनमानी कर रहा है। गेट पास जारी नहीं किए जाते और स्थानीय युवाओं को नौकरी नहीं दी जाती। उन्होंने इसे बेहद दुखद विषय बताया और कहा कि मजदूरों को अपने हक के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस संघर्ष में वे मजदूरों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे। सुरेश धाकड़ ने इंटक को कांग्रेस का संगठन बताते हुए कहा कि यहां चल रही गुंडागर्दी को खत्म करने के लिए ही भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार मजदूरों के साथ है और स्थानीय मजदूरों को ही प्राथमिकता दिलाने के लिए यह लड़ाई लड़ी जाएगी। आमसभा में मजदूरों की समस्याओं और भविष्य की रणनीति पर चर्चा आमसभा के दौरान श्रमिकों की रोजमर्रा की समस्याओं, अधिकारों और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। मजदूरों ने कहा कि ठेका श्रमिक होने के कारण उन्हें कई बार अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ता है। इस दौरान भारतीय मजदूर संघ से जुड़े मजदूरों के साथ मिलकर जिंक में यूनियन चुनाव करवाने की मांग को प्रमुखता से रखा गया। सभा में कहा कि यूनियन का असली उद्देश्य मजदूरों की आवाज को मजबूती देना और लोकतांत्रिक तरीके से उनका प्रतिनिधित्व तय करना है। पूरे कार्यक्रम का माहौल जोश और उत्साह से भरा रहा, जहां मजदूरों ने एकजुट होकर अपने हक के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।


