सीधी जिले में जातिगत टिप्पणियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर होता जा रहा है। सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक पोस्टों ने जहां सामाजिक समरसता पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं राजनीतिक दलों को भी सफाई देने पर मजबूर कर दिया है। विवाद की शुरुआत संतोष वर्मा की एक टिप्पणी से हुई, जिसका समर्थन भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह ने किया। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता से जोड़ते हुए संतोष वर्मा के बयान को उचित ठहराया। इसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। मामला उस समय और बिगड़ गया जब शुक्रवार शाम एडवोकेट रोहित मिश्रा ने एक पोस्ट के जरिए अजय प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ब्राह्मण समाज के खिलाफ गलत शब्दों के प्रयोग को जातिगत द्वेष फैलाने वाला बताया। इस बयान के बाद अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। शनिवार शाम विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता रहे वीरेंद्र सिंह बघेल ने सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट किया। उन्होंने दावा किया कि सीधी जिले में 500 से अधिक ब्राह्मण समाज की बहू-बेटियां कथित तौर पर अन्य जातियों में शादी कर चुकी हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया और सामाजिक तनाव और बढ़ गया। इसके बाद एडवोकेट रोहित मिश्रा ने सीधी एसपी से वीरेंद्र सिंह बघेल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। आंदोलन की चेतावनी अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के जिला अध्यक्ष पंडित राकेश दुबे ने कहा कि यदि वीरेंद्र सिंह बघेल तीन दिन में अपने दावे के समर्थन में सूची प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो थाने में आवेदन देकर एफआईआर की मांग की जाएगी। एफआईआर दर्ज न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। जिलाध्यक्ष बोले- भाजपा कार्यकर्ता नहीं बघेल इसी बीच भाजपा जिला अध्यक्ष देव कुमार सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि वीरेंद्र सिंह बघेल भाजपा के कार्यकर्ता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सिंह बघेल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के कार्यकर्ता रहे हैं और उन्होंने उसी पार्टी का प्रचार किया था। भाजपा ने कभी भी उन्हें अपनी कार्यकर्ताओं की सूची में शामिल नहीं किया। देव कुमार सिंह चौहान ने यह भी कहा कि किसी जाति या विशेष समुदाय के विरोध में बोलने वाले व्यक्तियों का वह समर्थन नहीं करते और ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।


