केएल सहगल हॉल में चल रहे 11वें युवा रंगोत्सव में नाटक दोस्त दोस्त न रहा का मंचन किया गया। यह नाटक यास्मीन रजा के प्ले पर आधारित था। अंकुर शर्मा द्वारा निर्देशित यह नाटक पहली बार मंच पर खेला गया। इसकी कहानी तीन दोस्तों के इर्द गिर्द घूमती है। जोकि इनमें पैदा हुई ईर्ष्या, गुस्से को दर्शाती है। कॉमेडी पर आधारित नाटक में एक डॉक्टर 4 लाख की पेंटिंग लाकर अपने दोस्त बलराम को दिखाता है। पेंटिंग देखकर दोस्त इसे पैसों की बर्बादी बताता है। बाद में वहीं दोस्त बलराम तीसरे दोस्त कश्मीर को बताता है। जो थोड़ा कंफ्यूज-सा होता है और अपनी शादी के बारे में विचार कर रहा होता है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक दोस्त जो परंपरागत आर्ट पसंद करता है और जाने-अनजाने अपने दोस्त की फीलिंग्स को दुख पहुंचाता है। जिस कारण उनकी दोस्ती में ईगो व ईर्ष्या आने लग जाती है। इनकी दोस्ती बचाने की तीसरा दोस्त कोशिश करता है। उसकी कोशिशें देखकर दर्शक खूब लोटपोट हुए। नाटक में अंकुर शर्मा, जीवन डोगरा व चाहत बावा ने प्रमुख भूमिकाएं निभाईं।


