रायपुर से प्रणेश सिंह, बिलासपुर से दीपक देवांगन और भिलाई से अनुराग शर्मा की रिपोर्ट ग्रामीण इलाकों में रविवार बीमार लोगों के लिए सबसे कठिन दिन बन गया है। दैनिक भास्कर की टीम ने लगातार दो रविवार को रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, जांजगीर और कोरबा जिले के सीएचसी, पीएचसी और एसएचसी का जायजा लिया तो अस्पताल तो खुले थे, लेकिन इलाज बंद था। ऑन कॉल डॉक्टर गायब रहे। कई जगह सिर्फ नर्स या वार्ड बॉय ही अस्पताल संभालते नजर आए। दुर्घटना, हार्ट पेन, फ्रैक्चर जैसे इमरजेंसी मामलों के मरीजों को बताया जा रहा कि आज रविवार है। एक एसएचसी में प्रसूति कक्ष की हालत देखकर साफ लगा कि यहां प्रसव कराना जान जोखिम में डालने जैसा है। यहां प्रसूति बेड पर धूल और गंदगी थी। रविवार का दिन ग्रामीण इलाकों में मरीजों के लिए सबसे कठिन बन गया है। अस्पतालों में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि इमरजेंसी होने पर डॉक्टर को फोन किया जाता है। इधर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का दावा है कि अस्पताल 24 घंटे खुले रहते हैं। ये है हकीकत… गर्भवती डॉक्टर के इंतजार में खड़ी रही…
टिकरापारा स्वास्थ्य केंद्र में मदोपहर 1.30 बजे न अंदर कोई नहीं मिला। टिकरापारा पुलिस की टीम भी एमएलसी के लिए परिसर में खड़ी थी। इसी समय घनश्याम साहू अपनी गर्भवती बहन को लेकर अस्पताल पहुंचा। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने गर्भवती को यहां नहीं बैठने की बात कह रहा था। हालांकि अस्पताल के इंचार्ज डॉ. अमोघ उपाध्याय ने इलाज की पूरी व्यवस्था होने का दावा किया। डॉक्टर, टेक्नीशियन, दवाइयां कुछ भी नहीं, मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में जाने की मजबूरी रायपुर: स्टाफ गायब मिले बिलासपुर : दवा भी नहीं देते दुर्ग-भिलाई: ज्यादातर केंद्र बंद रविवार अवकाश पर गाइडलाइन की जानकारी ली जाएगी रविवार के दिन मैंने कई उप स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकांश जगह केंद्र बंद मिले। रविवार को भी लोगों को चिकित्सा सुविधा मिल सके, इसके लिए इमरजेंसी टीम तैनात रखने के निर्देश दिए गए हैं। रविवार के अवकाश को लेकर सरकार की गाइडलाइन की जानकारी ली जाएगी। -श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री


