राजस्थान में इनब्रीडिंग से संकट में बाघ…:अब मप्र के टाइगर सुधारेंगे उनकी जीन क्वालिटी, पेंच की बाघिन समेत 3 टाइगर भेजने की तैयारी

राजस्थान में बाघों के समान जीनपूल के कारण जेनेटिक बीमारियों के बढ़ते संभावित खतरे को देखते हुए मप्र से दो बाघिन और एक बाघ भेजने की तैयारी है। पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि 3 साल की बाघिन पी-224 को रेडियो कॉलर पहनाकर ट्रांसलोकेशन के लिए तैयार कर लिया है। वह बेहद फीट व जेनेटिकली मजबूत है। अब आगे की कार्यवाही राजस्थान वन विभाग करेगा। एनटीसीए ने राजस्थान के दो टाइगर रिजर्व रामगढ़ विषधारी (बूंदी) और मुकुंदरा हिल्स (कोटा) के लिए अन्य राज्यों से 7 टाइगर ट्रांसलोकेट करने की मंजूरी दी है। इसी क्रम में मप्र से दो बाघिन और एक बाघ भेजा जाएगा। इससे पहले मप्र से ओडिशा के सतकोशिया टाइगर रिजर्व में ट्रांसलोकेशन किया गया था। मप्र से कुल 9 बाघों का इंटरस्टेट ट्रांसलोकेशन होना है। राजस्थान, छग और ओडिशा को तीन-तीन बाघ दिए जाएंगे। रणथंभौर : बाहरी प्रदेश से बाघ नहीं लाए, इसलिए बढ़ी इनब्रीडिंग रणथंभौर नेशनल पार्क में बाघों की इनब्रीडिंग चिंताजनक है। यहां 78 बाघ-बाघिन व शावक हैं, जिनमें 80% संतान बाघिन मछली और तीन नर बाघों के वंश से हैं। रणथंभौर के बाघों ने सरिस्का, मुकुंदरा जैसे अन्य रिजर्व आबाद करने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन यहां कभी बाहरी प्रदेश से बाघ नहीं लाए गए, जिससे इनब्रीडिंग बढ़ गई। पेंच की बाघिन को रेडियो कॉलर पहनाया है। अब राजस्थान वन विभाग जब उसे ले जाने की व्यवस्था करेगा, टीम उसे ट्रांसलोकेट कर देगी। सड़क या एयरलिफ्ट, इसका फैसला राजस्थान सरकार करेगी। -शुभरंजन सेन, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ इनब्रीडिंग और संभावित खतरे बाघों या किसी भी प्रजाति में इनब्रीडिंग का मतलब है- करीबी रिश्तेदारों का आपस में प्रजनन। जब बाघ आबादी में संख्या बहुत कम हो जाती है, तो जो बचे हुए बाघ हैं वही आपस में करीबी रिश्तों वाले होते हैं। आने वाली नस्लों में बीमारी और कमजोर होने की आशंका

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