हाई कोर्ट ने पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती-2019 का परिणाम रिवाइज करने का आदेश दिया हैं। जस्टिस दिनेश मेहता की अदालत ने आज गजेन्द्र सिंह व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाओं में कहा गया था कि भर्ती में आरपीएससी ने उन अभ्यर्थियों को भी शामिल कर लिया, जिन्होने ग्रेजुएशन के फाइलन ईयर में प्रवेश लिया था। जबकि नियमों के तहत केवल फाइनल ईयर की परीक्षा पास करने वाले और परीक्षा में शामिल होने वाले ही भर्ती के लिए पात्र हो सकते थे। ऐसे में आरपीएससी ने अपात्र लोगों का चयन किया हैं। याचिकाकर्ताओं के तर्कों से सहमत होते हुए हाई कोर्ट ने पूरी भर्ती परीक्षा का परिणाम रिवाइज करने का आदेश दिया हैं। अदालत के आदेश से फिलहाल भर्ती परीक्षा में नियुक्तियां अटक गई हैं। करीब 900 पदों पर अटकी नियुक्तियां
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा ने बताया कि इस मामले को लेकर हाई कोर्ट की जयपुर और जोधपुर बैंच में कई याचिकाएं लगी थी। जिसकी सुनवाई जस्टिस दिनेश मेहता ने हाइब्रिड तरीके से की। हमने कोर्ट को बताया कि भर्ती में न्यूनतम योग्यता ‘बीएससी बैचलर डिग्री इन वैटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबैंडरी’ रखी गई थी। आरपीएससी ने इस भर्ती परीक्षा की विज्ञप्ति 22 अक्टूबर 2019 को निकाली। विज्ञप्ति के अनुसार भर्ती में फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स भी शामिल हो सकते थे। जबकि राजस्थान पशुपालन सेवा नियम 1963 के तहत भर्ती में केवल वे ही अभ्यर्थी शामिल हो सकते है। जिन्होने न्यूनतम योग्यता प्राप्त कर ली हो या वे फाइनल ईयर के एग्जाम में शामिल हुए हो। हमने कोर्ट से कहा कि भर्ती में विज्ञप्ति के ऊपर नियम हैं। नियमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होने बताया कि भर्ती को लेकर 2 अगस्त 2020 को लिखित परीक्षा हुई थी। 29 सितम्बर 2023 से लेकर 11 जून 2024 तक इंटरव्यू हुए। वहीं परीक्षा का फाइनल रिजल्ट 3 अगस्त 2024 को आया। जिसे हमने चुनौती दी थी।


