विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन धान खरीदी में अनियमितता और किसानों की परेशानी को लेकर सदन में हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव देते हुए कहा- किसानों की पीड़ा को समझते हुए इसे ग्राह्य करके इस पर चर्चा कराई जाए, पर आसंदी ने ग्राह्यता पर चर्चा कराई। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने धान खरीदी और पंजीयन सिस्टम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार धान खरीदना नहीं चाह रही है। किसान रजिस्ट्रेशन के लिए भटक रहे हैं। इसके जवाब में खाद्यमंत्री दयालदास बघेल ने कहा- ऐसा नहीं है। 35 लाख टन धान की खरीदी की जा चुकी है। 24 घंटे ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। मंत्री के जवाब के बाद आसंदी ने स्थगन अग्राह्य कर दिया जिसके बाद विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। भूपेश बघेल ने कहा कि अव्यवस्था से लगता है सरकार सिस्टम को बर्बाद कर निजी हाथों में सौंपने का षडयंत्र कर रही है। उन्होंने कहा कि धान खरीदी से पहले कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे जिससे सरकार 15 नवंबर को धान खरीदी शुरू ही नहीं कर पाई। 1.60 करोड़ टन खरादी का लक्ष्य रखा गया है लेकिन अभी तक सिर्फ 35 लाख टन धान की खरीदी हुई है। किसानों को पंजीयन के लिए भटकना पड़ रहा है। एप पर पंजीयन के समय सिर्फ चकरी घूमते रहता है। पिछले साल के धान खरीदी का उठाव नहीं हो पाया। 87 लाख टन खरीदी का टोकन काट चुके हैं : साय सीएम साय ने धान खरीदी पर स्पष्ट किया है कि प्रदेश के 2739 खरीदी केंद्रों में धान खरीदी की जा रही है। इसके लिए 27.40 लाख किसानों तथा 34,39 लाख हेक्टेयर रकबे का पंजीयन कराया गया है। पिछली बार की तुलना में इस बार 7.5% किसान तथा 19% अधिक रकबे का पंजीयन किया गया है। ने पंजीयन कराया है। अब तक 35 लाख टन धान खरीदा जा चुका है जबकि 17.24 लाख टोकन से 87 लाख टन धान खरीदी के लिए जारी किया जा चुका है। अब टोकन तुंहर एप को 24 घंटे शुरू कर दिया गया है। इससे किसान आगामी 20 दिन का टोकन ले सकेंगे। 70% एप से तथा 30% ऑफलाइन पंजीयन करवा सकते हैं। अब तक किसानों को 7 हजार करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में अवैध धान परिवहन एवं भंडारण के 2000 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें 1.93 लाख क्विंटल का अवैध धान जब्त किया गया है। इसी तरह एग्रीस्टेक पंजीयन से संस्थागत पंजीयन, भूमिहीन किसान (अधिया/रेगहा), डूबान क्षेत्र के किसान, वन अधिकार पट्टाधारी किसान तथा ग्राम कोटवार (शासकीय पट्टेदार) श्रेणी के किसानों को एग्रीस्टेक पंजीयन से छूट प्रदान की गई है। किस विधायक ने क्या कहा


