अचानक लापता हो गया था 1 लाख लेकर निकला युवक:2 दिन बाद सरिस्का के जंगलों में मिली लाश, हत्या की वजह- पैसा या रंजिश? पार्ट-1

4 जून 2015 की वो सुबह अलवर के क्रिरासका गांव के लिए किसी भी दूसरे दिन की तरह ही थी। 27 साल का राजेंद्र उर्फ राज्या मीणा मां-पिता का इकलौता सहारा। जमीन बेचने के बाद बाइक पर हनुमानजी के दर्शन करने पांडुपोल की ओर निकला। जेब में 1 लाख रुपए और कुछ चेक थे। कुछ मंदिर में चढ़ाने थे। कुछ रकम रिश्तेदारों को देनी थी और कुछ घर लौटानी थी। देर शाम तक भी राजेंद्र नहीं लौटा। पिता रामपाल मीणा गेट पर टकटकी लगाए इंतजार कर रहे थे। तभी घर में अचानक कदमों की आहट हुई। गांव के मुरारी शर्मा और खेमचंद गुर्जर अंदर आए। दोनों ने आते ही उलाहना दिया- राजेंद्र ने दिन में गाली-गलौज की, समझा देना। दोनों का शाम को घर आना और राजेंद्र के बारे में अचानक बात करना परिजनों को खटका। फिर मुरारी ने एक और नाम लिया, राजाराम गुर्जर। वही राजाराम, जो दिन में उनके साथ था। जिसे गांव में कुछ लोग राजेंद्र का दोस्त भी मानते थे और कुछ उसका विरोधी। रामपाल ने तुरंत पूछा- कहीं तुम लोगों ने उसे देखा तो नहीं? और जवाब में मुरारी ने कहा- हां, शाम 5 बजे उसे राजाराम के साथ मोटरसाइकिल पर जाते देखा था। दोनों लौटे भी थे… राजाराम अपने घर गया है शायद। यह सुनते ही परिजनों के मन में बेचैनी बढ़ गई। वे सीधे राजाराम के घर पहुंचे। दरवाजा खुला, भीतर से राजाराम निकलकर आया, जैसे उसे आने वालों का पहले से अंदाजा था। उसके चेहरे पर हल्की घबराहट थी। उससे राजेंद्र के बारे में पूछा तो बोला- मैं तो उसे जंगल की तरफ जाते हुए उतारकर आ गया था। उसके बाद नहीं पता साहब। रामपाल को यह जवाब बिल्कुल नहीं जंचा। किसी को बीच जंगल में क्यों उतारेगा कोई? और वो भी उस समय, जब राजेंद्र के पास लाख रुपए थे और वह पांडुपोल से लौट रहा था। अनहोनी की आशंका अब गहराने लगी थी। उसी रात परिवार मालाखेड़ा थाने पहुंचा और रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने तुरंत तलाश शुरू की, लेकिन रात बहुत बीत चुकी थी। जंगल के रास्तों पर अंधेरा था। अगले दिन सुबह गांव से लेकर थाने तक सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा था- राजेंद्र कहां है? 5 जून की दोपहर में पुलिस को पहला सुराग मिला। कालीखल नाले के पास एक मोटरसाइकिल लावारिस हालत में मिली। वही बाइक, जिस पर सुबह राजेंद्र निकला था। पांडुपोल से वापस आने वाले रास्ते पर पुलिस ने जांच की, लेकिन राजेंद्र का पता नहीं चला। गांव में अफवाहें फैलने लगीं। संदेह सिर्फ एक ही आदमी पर जा रहा था…राजाराम। 6 जून को पुलिस सरिस्का के जंगलों में जांच कर रही थी। इसी दौरान एक कॉन्स्टेबल चिल्लाया- साहब, इधर… कुछ दिख रहा है। पुलिस टीम वहां पहुंची। पत्थर के नीचे राजेंद्र की लाश थी। गले में कपड़े का फंदा। माथे पर खरोंच। पैसे, चांदी की माला और मोबाइल सबकुछ गायब था। पुलिस ने शव मिलने के बाद राजाराम को डिटेन किया। पूछताछ शुरू हुई। राजाराम ने कुछ नहीं कहा। कल पार्ट-2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब

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