मध्य शहर के सबसे व्यस्त अग्रसेन चौराहे से हर दिन 1.40 लाख से ज्यादा वाहन चालक गुजरते हैं। यहां आए दिन ट्रैफिक जाम लगता है, जिससे लोग परेशान होते हैं। जाम की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए यहां फ्लायओवर बनाने का फैसला पिछले महीने हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में ही हो गया था, लेकिन निर्माण की जिम्मेदारी किस एजेंसी को दी जाए, यह अब तक तय नहीं हो सका है। फ्लायओवर पर करीब 55 करोड़ रुपए खर्च होना है और यह खर्च कौन वहन करेगा, फिलहाल तय नहीं हो सका है। इधर, फ्लायओवर निर्माण में छावनी अनाज मंडी का पेंच भी सामने आ रहा है। दरअसल, अनाज मंडी यहां से शिफ्ट होगी या नहीं इसका भी इंतजार किया जा है। आईडीए ने शहर के 11 प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक की स्थिति सुगम बनाने के लिए सर्वे किया था। नवंबर में हुई सड़क सुरक्षा समिति और अफसरों की बैठक में प्रस्तुत किए गए सर्वे के आधार पर अग्रसेन चौराहे को नौलखा से ज्यादा प्राथमिकता देते हुए यहां फ्लायओवर बनाने पर सहमति बनी थी। बैठक में प्रशासन, आईडीए, नगर निगम, एमपीआरडीसी, पीडब्ल्यूडी सहित विभिन्न विकास एजेंसियों के अफसर मौजूद थे। एक नजर में यह होगा फायदा इसलिए जरूरी है फ्लायओवर एजेंसी तय होने पर बनेगी फिजिबिलिटी रिपोर्ट
सर्वे में फ्लायओवर की जरूरत सामने आई है। निर्माण एजेंसी तय होने पर फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनेगी, डिजाइन तैयार होगी। इसमें आने वाली एमीनिटीज शिफ्टिंग व प्लान तैयार होगा। टेंडर करके निर्माण एजेंसी बुलाएंगे। इन सभी में छह से आठ महीने का समय लग सकता है, इसलिए निर्णय जरूरी है। आईडीए बनाएगा तो इसे गैर योजना मद में बनाना होगा, इसके लिए सरकार से अनुमति लेना होगी। नगर निगम व अन्य एजेंसी बनाएंगी तो भी अनुमति लेना होगी।


