जमीन बड़ी चुनौती:पुलिस, पीडब्ल्यूडी और निगम कर रहे मुआवजे का आकलन

डेढ़ साल से खजराना चौराहा के आगे मेट्रो को अंडरग्राउंड करने को लेकर चल रही जद्दोजहद खत्म हो गई है। नई डिजाइन की मंजूरी आदि की प्रक्रिया के बाद इसमें सबसे बड़ी बाधा सरकारी विभागों से जमीन अधिग्रहण ही है।
मेट्रो कॉर्पोरेशन को पुलिस विभाग, पीडब्ल्यूडी, जिला प्रशासन और नगर निगम से कई जगहों पर जमीन नहीं मिली है। विजय नगर थाना, पलासिया पुलिस क्वार्टर्स और मल्हारगंज थाना स्टेशन की जद में आ रहे हैं। मेट्रो कंपनी ने थानों के पीछे नई बिल्डिंग बनाने और मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा है। रानी सराय और रीगल तिराहे पर जैन ट्रस्ट की जमीन भी प्रभावित होगी। रानी सराय सहित अन्य इमारतों को लेकर मेट्रो के अधिकारी ने पुलिस विभाग के संबंधित अधिकारियों से मुलाकात की। राजबाड़ा पर निगम की मल्टीलेवल पार्किंग तोड़ी जाएगी, इसके मुआवजे का आकलन निगम कर रहा है। ये प्रक्रिया रहेगी- सीएम की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्य कैबिनेट, फिर मेट्रो रेल बोर्ड में रखेंगे। बोर्ड अध्यक्ष केंद्रीय आवासन मंत्री हैं। सर्वे, सॉइल टेस्टिंग, डिजाइन और टेंडर की प्रक्रिया होगी। इसमें दो से तीन माह लग सकते हैं। हालांकि अलाइनमेंट नहीं सिर्फ प्रारूप बदला है, इसलिए काम तेजी से शुरू हो सकता है। 27 स्टेशन होंगे, पत्रकार कॉलोनी स्टेशन हटाया खर्च कम करने पत्रकार कॉलोनी स्टेशन हटा दिया है। अब 31 किमी कॉरिडोर पर 27 स्टेशन रहेंगे। कनाड़िया के बाद अगला स्टेशन सीधे पलासिया पर बनेगा। एमजी रोड पर 8 से 10 मीटर जगह की जरूरत होगी
एमजी रोड पर मेट्रो को सिर्फ 8 से 10 मीटर जगह की जरूरत होगी, जहां से अंडरग्राउंड कॉरिडोर में प्रवेश के गेट बनेंगे। एमजी रोड 30 मीटर चौड़ा है, एलिवेटेड होने पर ट्रैफिक, पार्किंग में दिक्कत आती।

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