दलदली क्षेत्र में जाड़ा बितानेवाला लौह सारंग (ब्लैक स्टार्क) हजारीबाग पहुंचा है। विंटर विजिटर लौह सारंग, स्टार्क फैमिली की दुर्लभ प्रजाति है। इसका पूरा शरीर चमकीला काला है। पेट और छाती का भाग सफेद होता है। इसके अन्य नाम सुरमई, सुरमल और कृष्ण महाबक है। इसकी ऊंचाई 105 सेंटीमीटर तक होती है। इसी वजह से इसको महाबक नाम दिया गया। हजारीबाग में इसे लोटवा डैम में सोमवार को देखा गया। बर्ड वाचर अमित जैन ने सारंग की तस्वीर ली है। इसे झारखंड में बहुत कम देखा गया है। शीतकाल में अपने देश के उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं उसके आसपास के क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड में दिखते हैं। लौह सारंग ऋतु कालिक पक्षी (सीजनल बर्ड) है जो शीत ऋतु में उत्तर- पश्चिम से आकर पूरा जाड़ा बिताता है। मछली के साथ छोटे रेप्टाइल्स, केकड़े, घोंघा, सितुआ, केंचुए और जलीय कीड़ों को भोजन बनाता है। सूरज की रोशनी में, इसके काले पंख पर हरा बैंगनी रंग चमक पैदा करता है। इसके पंखों का फैलाव दो मीटर से अधिक तक हो सकता है। लौह सारंग आकार की तुलना में बहुत हल्का होता है, यही खूबी उसे हवा में ग्लाइड करने में मदद करता है। प्रजनन के लिए जाता है यूरोप शीतकाल बिताने के बाद यह प्रजनन के लिए यूरोप के मध्य और पूर्वी क्षेत्र में प्रवास पर जाता है। कुछ पूर्वी एशिया जाते हैं। पूरी दुनिया में इसकी 19 प्रजाति है, जिनमें से आठ अपने देश में दिखते हैं। स्टार्क फैमिली का सबसे दुर्लभ प्रजाति हड़गिला (ग्रेट एडजुड़ेंट) है। ग्रेट एंड्जुटेंट बिहार के भागलपुर में दिखता है। लौह सारंग अकेले या छोटे-छोटे झुण्ड में दलदली क्षेत्र व छिछले पानी में दिखता है।


