डीसी की पहल से सदर अस्पताल में सुधार की प्रक्रिया जारी स्वास्थ्य सेवाओं में दिखने लगा हैं सकारात्मक बदलाव

भास्कर न्यूज|गुमला उपायुक्त की पहल नियमित मॉनिटरिंग तथा वरीय एवं जिला स्तरीय अधिकारियों के साप्ताहिक भ्रमण के परिणामस्वरूप सदर अस्पताल गुमला में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है। अस्पताल में आधारभूत संरचना, तकनीकी उन्नयन, स्वच्छता, सुरक्षा तथा मरीज-केंद्रित सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिससे आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। सदर अस्पताल में टेली-मेडिसिन सुविधा को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत दो ऑनलाइन कैमरों के माध्यम से रिम्स, रांची के विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधा संपर्क स्थापित किया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत आईसीयू में भर्ती मरीजों की प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक रिम्स के डॉक्टरों द्वारा ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। यह सेवा पिछले माह से रोटेशनल आधार पर प्रारंभ की गई है, जिससे आपातकालीन एवं गंभीर मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श समय पर उपलब्ध हो पा रहा है। आईसीयू में आंशिक री-मॉडलिंग: आईसीयू में आंशिक री-मॉडलिंग करते हुए लघु आधारभूत संरचना मरम्मत, मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण, संक्रमण नियंत्रण तथा ऑनलाइन टेली-मेडिसन की व्यवस्था की गई है। वहीं आपातकालीन विभाग में मरम्मत कार्य के साथ-साथ मरीजों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रूफ कर्टेन लगाए गए हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एमटीसी में बीते छह माह के दौरान 80 प्रतिशत से अधिक बेड ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई है, जो सेवाओं की उपयोगिता को दर्शाता है। बाल रोग ओपीडी के सामने ‘मुस्कान’ राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत बच्चों के लिए प्ले एरिया का विकास किया गया है, जिससे उपचार के दौरान बच्चों को अनुकूल एवं सकारात्मक वातावरण मिल सके। साथ ही ‘गो-ग्रीन’ अवधारणा को बढ़ावा देते हुए अस्पताल परिसर में 100 से अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जित करने वाले पौधों का रोपण किया गया है। अटेंडेंट्स की सुविधा के लिए प्रतीक्षालय में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके साथ ही वेटिंग एरिया का विस्तार भी किया गया है, जहां अब एक समय में 100 से अधिक लोग बैठकर प्रतीक्षा कर सकते हैं, जिससे मरीजों के परिजनों को सुविधा मिल रही है। स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए वेस्ट वॉटर को एटीपी प्लांट में ब्लीचिंग पाउडर से ट्रीट कर सुरक्षित रूप से नाली में छोड़ा जा रहा है, जो पूर्व में नहीं किया जाता था। सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने अस्पताल में हो रहे बदलावों को लेकर बताया कि सदर अस्पताल जिले का एकमात्र ऐसा अस्पताल है, जहां सबसे अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रतिदिन लगभग 800 से 900 मरीज यहां उपचार हेतु आते हैं। हाल के दिनों में क्राउड मैनेजमेंट एक प्रमुख चुनौती के रूप में सामने आई थी, जिसे ध्यान में रखते हुए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। विस्तृत वेटिंग एरिया का निर्माण, टोकन आधारित पंजीकरण व्यवस्था तथा शीघ्र प्रारंभ होने वाला वॉयस कंट्रोल टोकन सिस्टम इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पैथोलॉजी की समुचित व्यवस्था है तथा 608 प्रकार की दवाएं मरीजों को निःशुल्क प्रदान की जा रही हैं। उपायुक्त ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि अस्पताल से संबंधित किसी भी प्रकार के सुझाव अथवा सुधार संबंधी विचार उपायुक्त कार्यालय के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर पर साझा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सुझाव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और आवश्यक सुधार करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा, ताकि सदर अस्पताल को और अधिक सुदृढ़ एवं जनहितैषी बनाया जा सके। नागरिकों से की सुधार संबंधी विचार देने की अपील

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