प्रदेश में निजी डेंटल संस्थानों में बीडीएस और एमडीएस में पीछे से दरवाजे से एडमिशन देने का मामला सामने आया है। ये संस्थान सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी कर बिना नीट पास और बिना काउंसलिंग बोर्ड के ही तीन साल की डिग्री में प्रवेश दे रहे हैं। नियमानुसार डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया नई दिल्ली की वेबसाइट पर यूजी या पीजी करने के बाद स्टूडेंट्स का नाम होना चाहिए। भास्कर के पास ऐसे 30 स्टूडेंट्स के नाम हैं, जिनके नाम वेबसाइट पर भी नहीं है। अब स्टेट डेंटल काउंसिल में पंजीकरण नहीं होने से ये प्रैक्टिस भी नहीं कर पा रहे। प्रवेश दिया, वेबसाइट पर नाम नहीं
केस-1- मोहित कुमार ने जोधपुर के व्यास डेंटल कॉलेज में एमडीएस डिग्री में 2018-19 में प्रवेश लिया था, लेकिन डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया नई दिल्ली की वेबसाइट पर नाम ही नहीं है। केस-2- रिदिमा व सोनू ने जयपुर से एमडीएस में वर्ष 2017-18 में प्रवेश लिया था, लेकिन दोनों का नाम डीसीआई नई दिल्ली की वेबसाइट पर नहीं है। प्रदेश में 11 हजार डेंटिस्ट, 1000 ने नवीनीकरण नहीं कराया गुप्ता ने कहा- सरकार को अनियमितता की जानकारी दे दी है
“हमने निजी डेंटल संस्थानों में प्रवेश के दौरान अनियमितताओं की जानकारी सरकार को दे दी है। सरकार उचित निर्णय लेकर कार्यवाही करेगी।” – डॉ. एचएल गुप्ता, अध्यक्ष, राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल जयपुर “मेडिकल, डेंटल में प्रवेश नीट काउंसलिंग ये ही लेना चाहिए। अन्यथा उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है।”
– डॉ. संकल्प मित्तल, रजिस्ट्रार, राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल


