फैशन शो में मंत्रीजी का ‘फोकस’:’कचरा’ उठाकर चले शिक्षा मंत्री; राज्यपाल से कहा- दादाजी का नाम महाराणा प्रताप

नमस्कार जो सत्ता में होता है उसे सवाल तो सुनने ही पड़ते हैं। चाहे मंत्रीजी जोधपुर में प्रेस ब्रीफिंग में हों या फिर कोटा में कचरा उठा रहे हों। जयपुर में मंत्रीजी का पूरा फोकस ‘मॉडल’ पर रहा। कैमरे से जूम करके शूट किया। वे भविष्य में नगरीय व्यवस्था का ऐसा ही मॉडल देखना चाहते हैं। सीमावर्ती जिले के विधायक ने नागरिकों के लिए लाइसेंसी बंदूकों की मांग कर दी तो दूसरे विधायकजी ने उन्हें बंदूक अनुपयोगिता समझा दी। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. आप सोच के आए हो कि बोलने नहीं देना है? मंत्रीजी परेशान हैं। कुछ भी करते हैं तो जनता सवाल उठाने लगती है। मंत्रीजी का सरोकार कोटा से रहा है। उन्हें सरकार के 2 साल की उपलब्धियां गिनाने जोधपुर भेज दिया। एक दस्तावेज पकड़ा दिया गया, जिसमें सारे काम-काज का ब्योरा था। मंत्रीजी ने प्रेस ब्रीफिंग में जाने से पहले शायद इसे पढ़ा नहीं था। सूर्यनगरी के पत्रकार ठंड में भी जून-जुलाई के सूर्य की भांति चमक रहे थे। प्रेस ब्रीफिंग शुरू होते ही पत्रकारों ने गोले दागने शुरू कर दिए। एक बोला- आप तो एक काम बता दो जिसने जोधपुर की तकदीर और तस्वीर बदल दी हो। मंत्रीजी दस्तावेज के पन्ने पलटने लगे। उन्होंने छांट-छांटकर स्कीमें गिनाना शुरू किया। लेकिन पत्रकार जोधपुर की सड़क-पानी पर अटके रहे। झल्लाकर मंत्रीजी ने कह दिया- सोचकर आए हो क्या कि मुझे बोलने ही नहीं दोगे? किसी तरह वह कठिन समय बीता। मंत्रीजी कोटा लौट आए। तीखे सवालों का सामना करने से अच्छा है कि वे कहीं फावड़ा-गैंती चला देते। गरीब बच्चे को गोद में उठाकर दुलार देते या फिर कचरे का ढेर परात में भरकर कचरे की गाड़ी में डाल देते। तीसरा आइडिया उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने एक गांव में जाकर पहले कचरा ढूंढा। फिर परात लेकर फावड़े से कचरा भरा और कंधे तक उठाकर कचरे की गाड़ी में डाल दिया। इसके बावजूद लोगों को चैन नहीं। सोशल मीडिया पर एक क्रिएटर ने उन्हें इसी पर लपेट लिया। बोला- मंत्रीजी से शिक्षा का भार नहीं उठ रहा, इसलिए कचरा उठा रहे हैं। 2. मंत्रीजी ने मॉडल पर किया ‘फोकस’ सरकार ने दो साल पूरे कर लिए हैं। सरकार के मंत्री दसों दिशाओं में घूमकर सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं। मीटिंग पर मीटिंग हो रही हैं। ब्रीफिंग पर ब्रीफिंग हो रही हैं। एक बात हर मंत्री के दिमाग में बैठा दी गई है कि हमें राजस्थान को मॉडल स्टेट बनाना है। जब से यह बात सुनी है, नगरीय विकास मंत्रीजी के कानों में एक ही शब्द गूंज रहा है- मॉडल, मॉडल, मॉडल। रविवार का दिन था। मंत्रीजी अपने आवास पर दालान में मोढ़े पर बैठकर सुबह की धूप से विटामिन डी सोख रहे थे। तभी कोट-पैंट धारी चार लोग उनके पास आए। बोले- सर आज रात जंतर-मंतर पर प्रोग्राम है, आपको आना है। मंत्रीजी भौंहे भी जोर लगाकर उठाई और कहा- अभी किसी भी कार्यक्रम में जाने का वक्त नहीं है भाई। बहुत सारा काम पड़ा है। एक लाल टाई वाले ने कहा- सर, कार्यक्रम में देश-विदेश की मॉडल आ रही हैं। मॉडल का नाम सुनते ही मंत्रीजी मोढ़े पर सीधे बैठ गए। उन्होंने सहमति दे दी। शाम को वे जंतर-मंतर पहुंच गए। वहां मॉडलों की लाइन लगी थी। मॉडल स्टेट की कल्पना करते हुए मंत्रीजी ने एक-एक मॉडल पर फोकस किया। एक मॉडल उन्हें विशिष्ट पसंद आया। जिसे उन्होंने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद किया। जूम करके देखा और सोचा- प्रदेश को ऐसा ही मॉडल बनाएंगे। 3. बंदूकें तो चूल्हे के काम की भी नहीं, गैस आ गई एक निर्दलीय युवा विधायक ने नई तान छेड़ दी। कहा कि सरहदी इलाकों में रहने वाले नागरिकों को लाइसेंसी बंदूकें दी जानी चाहिए। उन्होंने ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में बंदूकों की आवश्यकता और महत्व’ पर प्रकाश डालते हुए कहा- सीमावर्ती इलाके के लोगों ने हमेशा भारतीय सेना का साथ दिया है। जब जब मौका पड़ा है उन्होंने योद्धा की भूमिका निभाई है। इसलिए मैं मांग करता हूं कि सीमावर्ती जिले के लोगों को लाइसेंसी हथियार दिए जाएं। बूंदकें दी जाएं। ताकि वक्त आने पर वे किसी भी हालात का मुकाबला कर सकें। विधायकजी ने अपनी भावना व्यक्त कर दी। लेकिन बाद में इस पर वाद-संवाद प्रतियोगिता सी हो गई। हालांकि केंद्रीय मंत्रीजी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी कि ऐसी कोई विशेष जरूरत नहीं है। लेकिन चौहटन विधायक आदू राम मेघवाल ने यही बात अपने ही अंदाज में कही। वे बोले- बंदूक की जरूरत तो आजकल चूल्हा जलाने तक में नहीं रही। अब तो चूल्हे भी गैस से जलते हैं। उन्होंने बात आगे बढ़ाई- हमारी सेना के पास ऐसी-ऐसी मिसाइल हैं कि यहां से बटन दबाओ, मिसाइल उड़ते हुए जाएगी, जहां आतंकवादी छुपे हैं उसी बिल्डिंग में उसी माले पर जाकर उन्हीं आतंकवादियों को उड़ा देगी। अब बताओ, बंदूक की जरूरत है? 4. चलते-चलते.. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल उदयपुर पहुंचीं। यहां पूर्व राजपरिवार के दो नन्हे बच्चों से मिलीं। इन बच्चों के पिता का नाम लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ है। वे महाराणा प्रताप के वंशज हैं और मेवाड़ राजपरिवार के 77वें संरक्षक भी। उदयपुर में उन्होंने चित्रकला प्रदर्शनी और म्यूजियम शुरू किया। इसी का फीता काटने राज्यपाल महोदया पधारीं। ये बच्चे भी महाराणा प्रताप के वंशज। बच्चों जैसे सामान्य बच्चे। जिनका सामान्य ज्ञान भी बिल्कुल सामान्य। राज्यपाल मैडम ने बच्चों से हाथ मिलाया। फिर पूछ लिया- बच्चों बताओ आपके दादाजी का नाम क्या है? बच्चों ने एक-दूसरे का चेहरा देखा। सकुचाए। फिर दादाजी अरविंद सिंह मेवाड़ का नाम लेने के बजाय कहा-दादाजी का नाम महाराणा प्रताप है। आनंदी बेन ने बच्चों के मासूम जवाब में आनंद पाया और मुस्कान से भरी मनुहार सी की- आपको भी महाराणा प्रताप जैसा बनना है न? वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

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