एक देश एक चुनाव पर JPC की पहली बैठक:सांसदों को 18 हजार पन्नों की रिपोर्ट मिली; कांग्रेस ने ड्राफ्ट को संविधान विरोधी बताया

एक देश-एक चुनाव के लिए संसद में पेश हुए 129वें संविधान संशोधन बिल पर बुधवार को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की पहली बैठक हुई। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के सांसदों में जमकर बहस हुई। कानून मंत्रालय के प्रेजेंटेशन के बाद प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने एक साथ चुनाव कराने से खर्च कम होने के दावे पर सवाल उठाए। विपक्ष ने पूछा कि क्या 2004 लोकसभा चुनाव के बाद खर्च का कोई अनुमान लगाया गया था, जब पहली बार सभी 543 सीटों पर EVM का इस्तेमाल किया गया और माना जाता है कि इससे खर्च कम हुआ था। विपक्ष ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के लिए कई राज्यों की विधानसभा उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग करने और उनका कार्यकाल लोकसभा के साथ जोड़ने से संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन होता है। इस पर भाजपा के संजय जायसवाल ने कहा कि 1957 में लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए 7 विधानसभाएं समय से पहले भंग की गई थीं। तब क्या तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, जो संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे, नेहरू और अन्य सांसदों ने संविधान का उल्लंघन किया था। इसके अलावा सभी सांसदों को 18 हजार से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट वाली एक ट्रॉली दी गई, जिसमें हिंदी और अंग्रेजी में कोविंद समिति की रिपोर्ट की एक-एक कॉपी और अनुलग्नक की 21 कॉपी शामिल है। इसमें सॉफ्ट कॉपी भी शामिल है। भाजपा की सहयोगी पार्टी JDU ने भी उठाए सवाल
भाजपा की सहयोगी पार्टी JDU ने भी कुछ सवाल भी उठाए। पार्टी ने पूछा कि क्या मध्यावधि चुनाव के बाद छोटे कार्यकाल के लिए चुनी गई सरकार में शासन के लिए वह फोकस होगा जो पांच साल के कार्यकाल वाली सरकारों में होता है। बिल में प्रस्ताव है कि सरकार गिरने पर लोकसभा या विधानसभा के मध्यावधि चुनाव होते हैं, तो नई सरकार का कार्यकाल सदन के बचे हुए कार्यकाल के लिए ही होगा। इसके अलावा कुछ विपक्षी सांसदों ने JPC का कार्यकाल बढ़ाकर एक साल करने ही भी मांग की। JPC को बजट सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश करनी है। JPC की बैठक पर किसने क्या कहा… भाजपा सांसद और JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी बोले- हम सरकार के बिल की निष्पक्ष और खुले दिमाग से जांच करेंगे। हमारी कोशिश आम सहमति बनाने की होगी। मुझे विश्वास है कि हम देशहित में काम करेंगे और आम सहमति बना लेंगे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हर फैसला देश के हित में होता है। लगातार चुनाव देश के विकास में बाधा हैं। हम हमेशा चुनाव की तैयारी करते रहते हैं। कांग्रेस की तरफ से JPC के सदस्य सांसद सुखदेव भगत ने कहा- यह सरकार और PM मोदी की जिद का नतीजा है। वे बहुमत में हैं इसलिए JPC में बातचीत कम होगी। बहुमत के बल पर अपने विचार देश पर थोपने की कोशिश की जा रही है। संसद में बिल पेश करने के लिए वोटिंग कराई गई थी
कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने 17 दिसंबर को लोकसभा में एक देश-एक चुनाव को लेकर संविधान संशोधन बिल रखा था। विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद बिल पेश करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग कराई गई थी। कुछ सांसदों की आपत्ति के बाद वोट संशोधित करने के लिए पर्ची से दोबारा मतदान हुआ। इस वोटिंग में बिल पेश करने के पक्ष में 269 और विपक्ष में 198 वोट पड़े। इसके बाद कानून मंत्री ने बिल दोबारा सदन में रखा। कांग्रेस बोली- बिल पेश करते समय सरकार 272 सांसद नहीं जुटा पाई
कांग्रेस ने एक देश एक चुनाव विधेयक को लेकर 20 दिसंबर को कहा कि भाजपा इस बिल को कैसे पास कराएगी? क्योंकि संविधान संशोधन के लिए उसके पास सदन में दो तिहाई बहुमत (362 सांसद) नहीं हैं। बिल भले ही JPC के पास भेजा गया, लेकिन कांग्रेस इसका विरोध करती है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने PTI से बातचीत में कहा, ‘केंद्र सरकार बिल पेश करते समय 272 सांसद भी नहीं जुटा पाई थी। संविधान संशोधन के लिए उन्हें दो-तिहाई बहुमत कैसे मिलेगा। ये बिल संविधान की मूल संरचना, संघीय व्यवस्था और लोकतंत्र विरोधी है। हम एक देश,एक चुनाव बिल का विरोध करेंगे।’ दरअसल, 20 दिसंबर को राज्यसभा में इस बिल से जुड़े 12 सदस्यों को नामित करने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया। सभापति जगदीप धनखड़ ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से राज्यसभा के सदस्यों को समिति में मनोनीत करने के लिए प्रस्ताव पेश करने को कहा था। इसके बाद संसद की संयुक्त समिति को दोनों विधेयकों की सिफारिश करने वाला प्रस्ताव पारित किया गया। फिर बिल को 39 सदस्यीय JPC के पास भेजने का फैसला किया गया। एक देश-एक चुनाव क्या है…
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई। एक देश-एक चुनाव के लिए बनाई गई समिति ने मार्च में राष्ट्रपति को सौंपी थी रिपोर्ट
एक देश-एक चुनाव पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने करीब 191 दिनों में स्टेकहोल्डर्स और एक्सपर्ट्स से चर्चा के बाद 14 मार्च, 2024 को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी थी। एक देश-एक चुनाव को लागू करने के लिए संविधान संशोधन के जरिए संविधान में 1 नया अनुच्छेद जोड़ने और 3 अनुच्छेदों में संशोधन करने की व्यवस्था की जाएगी। संविधान संशोधन से क्या बदलेगा, 3 पॉइंट… ————————- एक देश-एक चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… क्या 2029 से देश में होगा वन इलेक्शन, फायदे-खामियों पर सब कुछ जो जानना जरूरी आजाद भारत का पहला चुनाव 1951-52 में हुआ। उस वक्त लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ होते थे। 1957, 1962 और 1967 तक ये परंपरा जारी रही। अब 2029 में ये परंपरा फिर से शुरू हो सकती है। इससे जुड़ा बिल संसद में पेश हो सकता है। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस सवाल उठाए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *