जेके योग रांची की ओर से अशोकनगर देवालय व चिंतन स्थल में मंगलवार को दो दिवसीय आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शाम 5:30 बजे से रात 8 बजे तक चला। स्वामी मुकुंदानंद के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधक शामिल हुए। प्रवचन के दौरान स्वामी मुकुंदानंद ने श्रीमद्भगवद्गीता, नारद भक्ति सूत्र और ईशावास्य उपनिषद् के माध्यम से जीवन के वास्तविक उद्देश्य और आत्मिक उन्नति के मार्ग को सरल व प्रभावशाली ढंग से समझाया। उन्होंने संसार की क्षणभंगुरता और परम सत्य की ओर संकेत करते हुए आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। एक छात्र और सिनेमा थिएटर से जुड़े दृष्टांत के माध्यम से उन्होंने बताया कि जीवन केवल भौतिक सुखों तक सीमित नहीं है। स्वामी ने स्वामी विवेकानंद और एक इंजीनियर के संवाद का उल्लेख करते हुए यह प्रश्न उठाया कि क्या जीवन का उद्देश्य केवल विवाह, संतान और भौतिक उपलब्धियों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि सच्चा सुख चेतना के उच्च स्तर पर पहुंचने से ही संभव है। गीता के वैदिक मनोविज्ञान के माध्यम से उन्होंने मानव असंतोष, तनाव और मानसिक विकारों के कारणों पर भी प्रकाश डाला तथा लोभ, क्रोध और कामना जैसी प्रवृत्तियों को सही दिशा में परिवर्तित करने के उपाय बताए। कार्यक्रम के दौरान सत्संग, प्रश्नोत्तर सत्र, रूप वचन अभ्यास और स्वामी जी की पुस्तकों पर हस्ताक्षर का आयोजन भी हुआ। मंदिर परिसर में उनकी लिखित पुस्तकों का स्टॉल लगाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक पुस्तकें खरीदीं। इस अवसर पर रांची में जेके योग के वार्षिक लॉन्ग टर्म प्रोग्राम का भव्य शुभारंभ भी किया गया, जो भारत इवेंट्स 2025-26 के विशेष आयोजनों में शामिल है। भक्ति-भाव से ओतप्रोत कीर्तन, जयकारे और साधकों की सक्रिय सहभागिता ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।


