छिंदवाड़ा के परासिया सिविल अस्पताल के टॉयलेट में मिली नवजात बच्ची के मामले में खुलासा हुआ है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि बच्ची को मरा हुआ समझकर नहीं, बल्कि जिंदा ही कमोड में डालकर फ्लश किया गया था। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट के मुताबिक, उसके फेफड़ों और पेट में पानी भरा मिला है। यानी, कमोड में गिरने से पहले उसकी सांसें चल रही थीं और डूबने से उसकी मौत हुई। पुलिस जांच में सामने आया है कि सोमवार को ओपीडी में 15 गर्भवती महिलाएं चेकअप के लिए आई थीं। पुलिस ने इनमें से 14 महिलाओं की पहचान और जानकारी वेरिफाई कर ली है, लेकिन एक महिला संदिग्ध है, जिसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। आशंका है कि इसी महिला ने टॉयलेट में बच्ची को जन्म दिया और सबूत मिटाने के लिए उसे फ्लश कर वहां से भाग निकली। सफाईकर्मी ने देखा सिर, 7 घंटे तोड़फोड़ के बाद निकला शव घटना सोमवार शाम की है। सफाईकर्मी जब टॉयलेट गई तो फ्लश काम नहीं कर रहा था। झांककर देखा तो कमोड में नवजात का सिर और हाथ फंसा था। इसके बाद करीब 7 घंटे की मशक्कत के बाद कमोड तोड़कर शव को बाहर निकाला गया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची की नाल (गर्भनाल) भी शरीर से जुड़ी हुई थी। 26 कैमरों के फुटेज खंगाल रही पुलिस अस्पताल में लगे 26 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, जिस टॉयलेट में घटना हुई वहां कैमरा नहीं था, लेकिन पुलिस गैलरी और एंट्री गेट के फुटेज से संदिग्ध महिला और उसके साथ आए लोगों की पहचान करने में जुटी है। डॉ. शशि अतुलकर और डॉ. सुधांशु मानेकर की टीम ने पीएम किया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।


