इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित ग्रीन फील्ड रोड से प्रभावित उज्जैन जिले के 7 गांवों के किसानों ने बुधवार को अपनी मांगों को लेकर बाइक रैली निकाली। किसान काले झंडे बांधकर उज्जैन स्थित एमपीआरडीसी (MPRDC) कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि इस परियोजना से 7 गांवों के करीब 280 किसानों की लगभग 450 बीघा जमीन प्रभावित हो रही है। उनकी प्रमुख मांग है कि जमीन का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाए, न कि केवल सरकारी गाइडलाइन के अनुसार। इसके साथ ही किसानों ने ग्रीन फील्ड रोड की ऊंचाई कम करने और इसे सामान्य हाईवे के रूप में विकसित करने की मांग की, ताकि आसपास के गांवों के किसानों और ग्रामीणों को भी इसका लाभ मिल सके। काले झंडे लगाए थे प्रदर्शनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे रोड निर्माण कार्य बंद कराने जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे। प्रदर्शन के दौरान किसानों की बाइक पर काले झंडे लगे थे, जिन पर “MPRDC GO BACK” लिखा हुआ था। एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। उज्जैन संघर्ष समिति के राजेश सोलंकी ने बताया कि सुबह 11:30 बजे लिम्बा पिपलिया से बाइक रैली की शुरुआत हुई, जो गोंदिया, हासामपुरा, पालखेड़ी, चांदमुख, दाउदखेड़ी, चिंतामन गणेश, शांति पैलेस चौराहा, कोठी और फ्रीगंज होते हुए करीब दोपहर 1 बजे एमपीआरडीसी कार्यालय पहुंची। यहां किसानों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें लिखित रूप में रखीं। ऐसा बनेगा ग्रीन फिल्ड रोड- उज्जैन-इंदौर के बीच नया ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे करीब 2000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सिंहस्थ- 2028 को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इससे इंदौर से उज्जैन की दूरी और यात्रा 30-45 मिनट कम हो जाएगी। 48 किलोमीटर की यह सड़क पितृ पर्वत इंदौर से शुरू होकर सिंहस्थ बायपास उज्जैन तक बनेगी। मांगें नहीं मानी तो काम रोकेंगे किसान नेता राजेश सोलंकी ने कहा कि जमीन से 2 मीटर ऊंचा रोड बनाया जा रहा है। रोड में सिर्फ चार जगह एक्सेस दे रहे हैं। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो रोड का काम शुरू नहीं होने देंगे। आज हुए प्रदर्शन में माखन लाल, अर्जुन चौधरी, नारायण सिंह सहित करीब 200 किसान एकत्रित हुए थे।


