छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध बूंदी शहर को इको-फ्रेंडली और ग्रीन स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 60 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। बुधवार को जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर प्रस्तावित कार्यों का खाका तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। जिला कलेक्टर ने पुराने शहर को तारों के जंजाल से मुक्त करने की पहल की है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि पुराने शहर में बिजली के पोल हटाकर विद्युत लाइनों को भूमिगत किया जाए। इससे शहर का स्वरूप निखरेगा और संकरी गलियों में आवाजाही भी सुगम होगी। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर की ऐतिहासिक विरासत को भी संरक्षित किया जाएगा। जिला कलेक्टर ने तोपखाना स्कूल, ऐतिहासिक दरवाजों और अन्य ऐतिहासिक इमारतों के जीर्णोद्धार कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को पर्यटन स्थलों को आकर्षक स्वरूप देने के निर्देश दिए, जिससे पर्यटकों की संख्या बढ़ सके। जिला कलेक्टर ने बताया कि 60 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले इन कार्यों का मुख्य उद्देश्य शहर को बेहतर सुविधाओं से युक्त और सुंदर बनाना है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने को कहा, जिनसे शहर का स्वरूप बेहतर हो और पर्यटकों को सुखद अनुभव मिले। इसके अतिरिक्त, जलभराव की समस्या से निपटने के लिए व्यवस्थित नालियों का निर्माण और आवश्यकतानुसार सीसी सड़कों का निर्माण भी किया जाएगा। निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई। इस दौरान कोटा स्मार्ट सिटी की अधीक्षण अभियंता ज्योति रानी वर्मा, नगर परिषद आयुक्त धर्मेंद्र मीणा, अधिशाषी अभियंता एम.आर. मीणा, आरयूआईडीपी की अधिशाषी अभियंता सोनम शर्मा और जेवीवीएनएल के अधिशाषी अभियंता आर.के. बैरवा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


