बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली प्रदेश की सबसे बड़ी एजेंसी रूडसिको की कार्यप्रणाली पर पीएचईडी और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने सवाल खड़े किए है। उन्होंने कहा कि अमृत मिशन के तहत जो काम एजेंसी को सौंपे गए थे, उसमें एजेंसी डीपीआर तक समय पर नहीं बना पा रही। इस कारण कई प्रोजेक्ट लेट हो गए। इसे देखते हुए हमने पीने के पानी की सप्लाई से जुड़े प्रोजेक्ट्स पीएचईडी को सौंपे है। बुधवार को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचईडी) मंत्री कन्हैया लाल चौधरी और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने सरकार के 2 साल पूरे होने पर सरकार की तरफ से किए कार्यो का लेखा-जोखा पेश करने के दौरान ये बात कही। मंत्री चौधरी ने कहा, हमारी सरकार से पहले पूर्ववर्ती सरकार ने अमृत मिशन के तहत पेयजल सप्लाई से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स ऐसे शुरू कर दिए, जिनकी फिजीबिलिटी नहीं थी। मौके पर पानी की टंकियां बना दी, पाइप लाइन्स बिछा दी और पता चला कि उन टंकियों तक पानी लाने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण उनको पूरा करने के बाद उनकी उपयोगिता सही से नहीं हो रही। अब हमें उन पर काम करवाना पड़ रहा है। साथ ही अब हमने अमृत मिशन के तहत होने वाले तमाम प्रोजेक्ट्स के लिए जनप्रतिनिधियों के सुझाव लेने शुरू कर दिए है, ताकि प्रोजेक्ट का आमजन को फायदा मिल सके। उन्होने बताया अमृत मिशन 2.0 के तहत अब तक 175 नगरीय निकायों के लिए 54 निविदाएं आमंत्रित की गई। इनमें से 104 निकायों की 32 निविदाओं में 1174.45 करोड़ रुपए के वर्कऑर्डर जारी कर काम शुरू कर दिया है। शेष 73 निकायों के लिए 2521.42 करोड़ रुपए की 22 निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी है। 2 साल में 13.78 लाख लोगों को दिए कनेक्शन मंत्री चौधरी ने बताया- हमने जल जीवन मिशन के तहत गत सरकार की तुलना में कहीं ज्यादा कनेक्शन दिए। पिछली सरकार ने प्रति वर्ष औसतन 1000 गांवों के अनुसार 5 वर्षों में 5 हजार 27 गांवों में 39.28 लाख कनेक्शन देकर 19 हजार 500 करोड़ रुपए व्यय किए थे। लेकिन जब से हमारी सरकार सत्ता में आई है, हमने 4000 गांव प्रति वर्ष के अनुसार 2 साल में ही 7 हजार 900 से अधिक गांवों में 13.78 लाख कनेक्शन दे दिए हैं। इन पर प्रति वर्ष 5300 करोड़ रुपए के अनुसार 10 हजार 612 करोड़ रुपए व्यय हुआ। जेजेएम में 37 कर्मचारी अब तक सस्पेंड मंत्री ने बताया- जल जीवन मिशन के तहत कार्यों में अनियमितता की शिकायतों पर भी हमने जीरो टोलरेंस की नीति के साथ काम किया। जनवरी 2024 से इस साल दिसम्बर तक हमने इस मिशन से जुड़े 37 अधिकारियों को काम में गड़बड़ी करने या लापरवाही करने के मामले में सस्पेंड किए है। जबकि 86 कार्मिकों को सीसीए नियम-16 के तहत, 50 कार्मिकों को सीसीए नियम-17 के नोटिस जारी किए है। इसके अलावा मैसर्स श्याम व गणपति ट्यूबवैल प्रकरण में 139 कार्मिकों पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन हैं।


