खंडवा नगर निगम में बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। निगम कर्मचारियों ने काम बंद कर महापौर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर को कलेक्ट्रेट कार्यालय में हुई बैठक के दौरान SDM ऋषि सिंघई ने उन्हें अमर्यादित शब्द बोले थे। कर्मचारियों का आरोप है कि SDM ने उन्हें बैल और भेड़ की संज्ञा दी और भ्रष्टाचार करने वाला बताया। एसडीएम के खिलाफ किया प्रदर्शन
निगम कर्मचारियों की मांग है कि, SDM को पद से हटाया जाए और उनकी अभद्रता के खिलाफ कार्रवाई की जाए। महापौर अमृता यादव ने कहा कि, उन्होंने कलेक्टर से मिलकर SDM पर कार्रवाई की मांग की हैं। क्योंकि SDM एक बड़े पद के अधिकारी हैं और उन्हें सोच विचार कर बोलना चाहिए। एमआईसी सदस्य राजेश यादव ने कहा कि SDM को तुरंत हटाना चाहिए, नहीं तो शहर में अराजकता का माहौल पैदा होगा। SDM ने निगम कर्मचारियों और पार्षदों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जो गलत है। जब वे सोकर नहीं उठते तब तक कर्मचारी काम शुरू कर देते हैं
इधर, निगम कर्मचारी संघ अध्यक्ष हरीश दुबे ने कहा कि SDM ने हमारे कर्मचारियों के साथ अभद्रता की है, इसलिए हम SDM से कहना चाहते हैं कि वे हमें इतना भी छोटा कर्मचारी ना समझें। हमारे कर्मचारी सुबह 5 बजे से काम शुरू करते हैं, जब SDM साहब सोकर भी नहीं उठते, और तब तक काम करते रहते हैं जब वे सो जाते हैं। एसडीएम बोले- आरोप निराधार, खेद प्रकट करता हूं मामले में एसडीएम ऋषि सिंघई का कहना है कि, पूरे आरोप निराधार हैं। दो दिन पहले पट्टा अभ्यर्थियों को लेकर एक मीटिंग हुई थी। जिसमें नगर निगम और राजस्व विभाग के कर्मचारी प्रशिक्षण ले रहे थे। इस दौरान प्रशिक्षण अवधि समाप्त होने के बाद कुछ लोगों को लगा कि उनको भ्रष्ट कहा, जबकि उनसे सामान्य रूप से कहा गया था कि सर्वे के पूर्व आवेदन आए हैं तो कैसे आ गए, और किस माध्यम से आए हैं। बाकी कोई बात नहीं थी, गलत तथ्य पेश किए जा रहे हैं। यदि किसी को लग रहा है कि हमने ऐसा किया हैं, तो हम खेद प्रकट करते हैं।


