किसान बोले-खाद के दुकानदार हमारी मजबूरी का फायदा उठा रहे:कालाबाजारी कर कट्टों की दोगुनी कीमत वसूल रहे, सर्वर डाउन का बहाना बना दुकान बंद की

सरकारी कृषि समिति में खाद का एक कट्टा 266 रुपए में मिलता है, लेकिन यहां 2 कट्टों के लिए 930 रुपए लिए जा रहे हैं। खाद की दुकान पर सुबह 7 बजे से लाइन लग गई थी। मैं खुद सुबह 8 बजे दुकान पर पहुंच गया था, फिर भी शाम तक खाद नहीं दी गई। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुली कालाबाजारी की जा रही है। चित्तौड़गढ़ शहर में खाद की भारी किल्लत को लेकर किसानों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। जिलेभर से आए किसान अलसुबह से लाइनों में लगे रहे, लेकिन शाम तक उनका नंबर नहीं आया। किसानों का आरोप है कि खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। खाद के कट्टों की कीमत तय से दोगुना वसूली जा रही है। किसानों का कहना है कि वे सुबह से सेंती स्थित दीर्घ इंटरप्राइजेज की दुकान के बाहर लाइन में खड़े रहे, लेकिन उन्हें समय पर खाद नहीं मिली। दुकानदार मनमाने दाम वसूल रहा है। पढ़िए- पूरी रिपोर्ट विरोध करने पर सर्वर डाउन का बहाना कर दुकान बंद कर दी
सेंती स्थित दीर्घ इंटरप्राइजेज पर सुबह 7 बजे से किसानों की लाइन लगना शुरू हो गई। काफी देर तक किसानों का नंबर नहीं आया तो उन्होंने विरोध जताया। दुकानदार ने “सर्वर डाउन” होने की बात कहकर दुकान बंद कर दी। किसानों का कहना है कि उनसे पहले ही रुपए ले लिए गए थे, फिर भी खाद नहीं दी जा रही थी। सुबह से लाइन में लगे किसानों को बार-बार कहा गया कि पोश मशीन काम नहीं कर रही है। जरूरत न होने पर भी महंगी चीज थोपने का आरोप
किसानों का आरोप है- दुकानदार नैनो पोटेशियम की शीशी लेने के लिए मजबूर कर रहा था, इसके लिए 1 हजार रुपए मांगे जा रहे थे। जबकि इसकी उन्हें कोई जरूरत नहीं थी। खाद के दाम भी सरकारी तय रेट से लगभग दोगुने वसूले जा रहे है और ज्यादा रकम देने के बाद भी खाद नहीं दी जा रही है। किसान बोले- दुकानदार वसूल रहे दोगुना कीमत सेंती निवासी बजय राम गुर्जर ने बताया- सरकारी कृषि समिति में खाद का एक कट्टा 266 रुपए में मिलता है, लेकिन यहां दो कट्टों के लिए उनसे 930 रुपए लिए जा रहे हैं। दुकानदार पैसे लेने के बाद भी कोई पर्ची या रसीद नहीं दे रहा है। दुकानदार जबरदस्ती एक शीशी खरीदने का दबाव बना रहा है। जबकि उन्हें उसकी कोई जरूरत नहीं है। खाद लेने की मजबूरी का फायदा उठाकर किसानों से मनमानी राशि वसूली जा रही है। सुबह से लाइन में, फिर भी नहीं मिली खाद
सेंती निवासी नवीन मोड का कहना है- सुबह 7 बजे से ही खाद लेने के लिए लाइन लगनी शुरू हो गई थी। वे खुद सुबह 8 बजे दुकान पर पहुंच गए थे। लेकिन दोपहर तक भी उन्हें खाद नहीं दी गई। खाद के 2 कट्टों के लिए उनसे 900 रुपए से ज्यादा मांगे जा रहे थे। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाद नहीं मिलने से किसानों में भारी नाराजगी है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कंपनी रेट कुछ और, वसूल कुछ और रही
लाल जी का खेड़ा निवासी किसान लोकेश लोधा ने कहा- कंपनी द्वारा तय खाद की कीमत 266 रुपए प्रति कट्टा है, लेकिन दुकानदार उनसे दो कट्टों के 930 रुपए वसूल रहा है। एक कट्टे के लिए भी 450 रुपए लिए जा रहे हैं। यह पूरी तरह से गलत है और किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर खुली कालाबाजारी की जा रही है। अधिकारियों के पहुंचते ही बदली स्थिति
हालांकि किसानों का विरोध की सूचना मिलते ही कृषि विभाग के 2 अधिकारी मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही दुकानदार ने दुकान खोली। उसके बाद अधिकारी के कहने पर ऑफलाइन ही खाद देने की कार्रवाई शुरू हुई। अधिकारी ने दुकानदार को पर्ची देने और ज्यादा रुपए नहीं वसूलने की हिदायत दी। इस दौरान किसानों ने कहा कि दोषी दुकानदार पर सख्त कार्रवाई हो और खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाई जाए, जिससे उन्हें सही दाम पर खाद मिल सके। अधिकारी बोले- मांग ज्यादा, सप्लाई कम
कृषि विभाग के अधिकारी दिनेश कुमार जागा ने बताया- इस समय किसानों में यूरिया को लेकर काफी ज्यादा मांग देखने को मिल रही है। इसकी मुख्य वजह है कि इस बार गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़ा है। पिछले साल की तुलना में ज्यादा क्षेत्र में गेहूं बोया गया है, इसलिए यूरिया की खपत भी स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है। जिले में कुल करीब 55 हजार मैट्रिक टन यूरिया की मांग है, जबकि अभी तक 47 हजार मैट्रिक टन यूरिया पहुंच चुका है, उसका वितरण भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा- विभाग किसानों को लगातार समझा रहा है कि वे सामान्य यूरिया की जगह तरल नाइट्रोजन खाद का ज्यादा इस्तेमाल करें। सामान्य यूरिया की उपयोग क्षमता केवल लगभग 30 प्रतिशत ही होती है, यानी इसकी बड़ी मात्रा हवा में उड़ जाती है या जमीन में बेकार चली जाती है। जबकि तरल नाइट्रोजन खाद से पौधों को पोषक तत्व सही मात्रा और सही तरीके से मिलते हैं, जिससे फसल को ज्यादा फायदा होता है। रेट तय, कालाबाजारी पर करेंगे कार्रवाई
उन्होंने कहा- यूरिया का सरकारी रेट 266 रुपए 50 पैसे प्रति कट्टा तय है, उसी दर पर किसानों को खाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए। तरल यूरिया भी उपलब्ध है और उसका वितरण किया जा रहा है। यदि कहीं भी दुकानदार द्वारा ज्यादा दाम वसूलने या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दुकानों पर भीड़ और अव्यवस्था को रोकने के लिए आधार कार्ड के जरिए खाद वितरण जैसी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि हर किसान को सही समय पर और सही मात्रा में खाद मिले, जिससे उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। यूरिया की सप्लाई लगातार जारी है
कृषि विभाग उद्यान के डिप्टी डायरेक्टर शंकरलाल जाट ने बताया- जिले में यूरिया लेने के लिए किसानों की लगातार लाइन लग रही है। इस बार जिले में करीब 55 हजार मीट्रिक टन यूरिया की कुल मांग है। अब तक लगातार रैक के माध्यम से यूरिया पहुंच रहा है। कल मंगलवार को भी एक- दो रैक आई थीं और आज भी एक रैक के देर शाम तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें जिले के लिए लगभग 550 मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन है। जीएसएस तक पहुंचाई जा रही खाद
शंकरलाल जाट ने बताया- कल मंगलवार को ही इफको द्वारा जिले को करीब 900 मीट्रिक टन यूरिया मिला है, जिसे जिले की अलग–अलग ग्राम सेवा सहकारी समितियों (जीएसएस) तक पहुंचा दिया गया है। इसके अलावा पिछले 15 दिनों में जिले में करीब डेढ़ लाख कट्टे यूरिया की सप्लाई हो चुकी है। अभी भी लगातार सप्लाई जारी है और चंबल से बाय रोड लगभग 400 मीट्रिक टन यूरिया की गाड़ियां आ रही हैं। आगे भी एक और खेप आने का प्रस्ताव है। कृषि अधिकारी बोले – घबराने की जरूरत नहीं
शंकरलाल जाट ने साफ कहा कि जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है। सप्लाई लगातार हो रही है और आगे भी होती रहेगी। इसलिए किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। विभाग का प्रयास है कि सभी किसानों को समय पर खाद मिलती रहे और किसी को परेशानी न हो। कई बार ऐसा होता है कि किसानों को जिस दिन जरूरत होती है, उससे पहले ही वे यह सोचकर यूरिया खरीद लेते हैं कि बाद में शायद नहीं मिले। इसी वजह से अनावश्यक भीड़ और लाइन लग जाती है। किसानों से आग्रह है कि जितनी जरूरत हो, उतनी ही मात्रा में यूरिया खरीदें।

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