राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि अलवर के क्रिरासरका गांव का राजेंद्र मीणा 4 जून 2015 को जमीन बेचने के बाद बाइक पर हनुमानजी के दर्शन करने पांडुपोल की ओर निकला। जेब में 1 लाख रुपए और कुछ चेक थे। देर शाम तक भी राजेंद्र नहीं लौटा। कहीं कुछ पता नहीं चला तो घरवालों ने पुलिस में रिपोर्ट दी। पुलिस ने जांच शुरू की तो 6 जून को सरिस्का के जंगलों में राजेंद्र की लाश मिली। शक की सुई राजाराम पर घूमी, जिसे आखिरी बार राजेंद्र के साथ देखा गया था। अब पढ़िए आगे की कहानी… बार-बार आधी-अधूरी बात बताई
पुलिस को राजाराम गुर्जर पर शक था, लेकिन सबूत नहीं थे। पुलिस ने राजाराम को ध्यान से देखा तो पाया कि उसके व्यवहार में एक अजीब-सी सहजता थी। जैसे उसे पता ही न हो कि उन पर हत्या का शक है। पुलिस के पास समय कम था और सबूतों की जरूरत थी। राजेंद्र की लाश जिस जगह मिली थी, वह सरिस्का के जंगल का ऐसा इलाका था जहां बिना वजह कोई नहीं जाता। यह बात ही शक को गहरा करने के लिए पर्याप्त थी। जब राजाराम को पहली बार पूछताछ रूम में बैठाया गया, वह अनमना था। उसने वही पुरानी कहानी दोहराई- साहब, उसे तो मैंने जंगल की तरफ उतार दिया था, लेकिन पुलिस जानती थी कि यह बात आधी-अधूरी है। पुलिस ने धीरे-धीरे वह सारे तथ्य रखने शुरू किए, जो लाश मिलने के बाद सामने आए थे। जैसे- गले में बंधा कपड़े का फंदा, जेब से गायब एक लाख रुपए, मोबाइल, चांदी की माला। पुलिस राजाराम के चेहरे के बदलते हावभाव को नोट कर रही थी। 4 घंटे की पूछताछ के बाद हत्यारे ने राज उगले
आखिरकार, चार घंटे की पूछताछ के बाद, राजाराम टूटने लगा। फिर बोला- हां साहब, गलती हो गई। मैंने ही मारा है। उसके पास पैसे थे… बहुत पैसे…। पुलिस के सामने पूरी कहानी साफ हो गई… राजेंद्र शाम के समय पांडुपोल से लौट रहा था। राजाराम ने रास्ते में उसे रोका। बातों-बातों में झगड़ा शुरू किया। फिर मौका देखकर, जंगल की तरफ ले गया। वहां राजेंद्र का गला कपड़े के फंदे से कस दिया था। जब उसे लगा कि वह मर चुका है तो लाश को नाले के किनारे खींचकर ले गया और पत्थरों से ढक दिया। इसके बाद राजेंद्र की जेब से रुपए, मोबाइल व चांदी की माला निकाल ली। उम्रकैद की सजा हुई
पुलिस ने आरोपी के पास से 30 हजार रुपए बरामद किए। अब पुलिस के पास था आरोपी का खुद का कबूलनामा और बरामद राशि। सबसे ज्यादा जरूरी 32 गवाहों के बयान, जिन्होंने शाम 5 बजे दोनों को साथ देखा था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। एससी-एसटी अदालत में सुनवाई शुरू हुई। दस साल चले इस केस में हर सुनवाई एक नई परत खोलती चली गई। दस साल बाद अदालत ने राजाराम को उम्रकैद सुनाई। पैसे लेकर निकले युवक की हत्या:सरिस्का के जंगल में पत्थरों के नीचे मिली लाश, जमीन बेचने के बाद मंदिर गया था, पार्ट-1


