भास्कर न्यूज | गढ़वा अगर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत देखनी हो तो गढ़वा के सदर अस्पताल आइए। सिर की गंभीर चोट, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को यहां इलाज के बजाय निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। हालत यह है कि कोरोना काल में खरीदे गए 19 वेंटिलेटर, जिनकी कीमत 1 करोड़ रुपए से अधिक है। इस्तेमाल के अभाव में धूल फांक रहे हैं। जानकारी के अनुसार उक्त वेंटिलेटर कोरोना काल के दौरान पीएम केयर के फंड से खरीदा गया था। कोरोना काल के चार वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक सदर अस्पताल का वेंटिलेटर को शुरू नहीं किया गया है। सरकारी अस्पताल में हर दिन 2-5 गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर चालू न होने के कारण रेफर किया जा रहा है। इन मशीनों को चलाने के लिए न तो टेक्नीशियन हैं और न ही वे फिलहाल उपयोग लायक हैं। वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां 24 घंटे का खर्च 1500-2000 रुपए तक होता है। सरकारी अस्पताल में इस तरह की सुविधाएं न होने से गरीब मरीजों के सामने इलाज का संकट खड़ा है। कोरोना महामारी के दौरान सदर अस्पताल के लिए 19 वेंटिलेटर खरीदे गए थे। इनमें नार्मल, फेस मास्क और मैकेनिकल वेंटिलेटर शामिल थे। नार्मल वेंटिलेटर की कीमत डेढ़ से सवा दो लाख रुपए, फेस मास्क श्रेणी के वेंटिलेटर की कीमत 5.70 लाख रुपए और मैकेनिकल वेंटिलेटर की कीमत छह लाख रुपये से अधिक थी। बावजूद इसके, आज ये सभी मशीनें बेकार पड़ी हैं। किन मरीजों को पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत : सिर और सीने की गंभीर चोट, हार्ट अटैक, लकवा, लीवर और किडनी फेल होने जैसी समस्याओं के अलावा ऑपरेशन के बाद कुछ मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने बताया कि कोरोना काल के दौरान खरीदा गया। वेंटिलेटर कोरोना के दौरान मरीज को उससे इलाज मिल रहा था। उसके बाद पूर्व के उपाधीक्षक के द्वारा वेंटिलेटर मशीन को क्यों हटाया गया। इसकी जानकारी नहीं है। पूर्व में प्रीकैटड अस्पताल में अज्ञात चोरों के द्वारा चोरी की घटना हुई थी। जिसमें अस्पताल प्रबंधन के द्वारा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि एक माह के अंदर सदर अस्पताल कैंपस में बने 60 बेड का प्रीकैंटड अस्पताल में तीन भाग में उसे बांटकर जल्द शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिसमें 20 बेड का भेंटीलीटर, 5 से 7 बेड का डायलिसिस, 17 से 20 बेड का आयुष्मान वार्ड बनाया जाएगा। बाकी बचे बेड को हड्डी विभाग या सर्जरी विभाग के लिए रखा जाएगा।


