14 जनवरी को गर्म कुंडों पर बड़ी संख्या में पहुंचते हैं पर्यटक…इसलिए सरकार की पहल
झारखंड के सभी गर्म कुंडों पर साबुन और डिटर्जेंट के इस्तेमाल पर रोक लगेगी। पर्यटन निदेशालय ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया है। पर्यटन निदेशक ने सभी डीसी को पत्र भेजकर जरूरी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि साबुन-शैंपू और अन्य डिटर्जेंट के इस्तेमाल से इन कुंडों के पानी की शुद्धता प्रभावित हो रही है। हर साल जनवरी में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि ऐसा न हो। राज्य में लातेहार में तातापानी, धनबाद में तेतुलिया, दुमका में झरियापानी और हजारीबाग के बरकट्ठा में सूरजकुंड गर्म कुंड हैं। इसके अलावा कई अन्य जगहों पर भी छोटे-छोटे गर्म कुंड हैं। साबुन आदि के इस्तेमाल से पानी में ऑक्सीजन की स्थिति खराब हो रही है। क्योंकि साबुन में वॉशिंग सोडा और फॉस्फोरस आदि होता है, जो ऑक्सीजन की मात्रा कम कर उसे दूषित करता है। ऐसे में पर्यटन विकास के तहत वहां पर्यावरण और पानी की शुद्धता बनाए रखना जरूरी है। डीसी को कहा गया है कि वे अपने-अपने जिले के अनुमंडल पदाधिकारी, बीडीओ, मुखिया, पंचायत प्रमुख, जिला परिषद और जनप्रतिनिधियों से समन्वय कर पानी की शुद्धता कायम रखने का प्रयास करें। पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग पर भी रोक
पर्यटन निदेशालय ने सभी पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग पर भी रोक लगाने को कहा है। डीसी से कहा गया है कि क्रिसमस और नववर्ष के उपलक्ष्य में राज्य के जलप्रपात, पार्क, डैम, तालाब और वनक्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। वहां पिकनिक मनाते हैं और पेपर प्लेट, थर्मोकोल प्लेट, प्लास्टिक के ग्लास के साथ पॉलीथिन आदि छोड़ जाते हैं। इससे पर्यटन स्थल पर गंदगी फैली रहती है। यहां साफ-सफाई और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जरूरी है। ताकि पर्यटकों को यह स्थल आकर्षक दिखे और वे यहां आने के लिए आकर्षित हों। मांसपेशियों के दर्द, गठिया और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है गर्म कुंड का पानी
गर्म कुंड भूमिगत स्रोतों से निकलने वाला गर्म पानी होता है। इसमें सल्फर और अन्य खनिज मौजूद होते हैं। इसका चिकित्सा के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी है। माना जाता है कि इसमें मौजूद खनिज त्वचा संबंधी समस्याओं को ठीक करने में मदद करते हैं। मांसपेशियों के दर्द, गठिया और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है। रक्त संचार बढ़ाता है। तनाव कम करता है और मानसिक शांति मिलती है।
मकर संक्रांति जैसे अवसरों पर इन कुंडों में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि गर्म कुंड में स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। चारों गर्म कुंड पर 14 जनवरी से पर्यटकों की भीड़ उमड़ेगी।


