शहर को जोड़ने वाली चार प्रमुख सड़कों को फोरलेन बनाने का काम बिजली और लाइट के खंभे तथा पेड़ नहीं हटने के कारण ठप पड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 में हीरादास से गोलपुरा गौशाला तक 20 करोड़, मान सिंह सर्किल से अपना घर आश्रम तक 75 करोड़, रेलवे फ्लाइओवर से मथुरा रोड तक 25 करोड़ और खेमकरण से जघीना तक 15 करोड़ की लागत से चौड़ीकरण व फोरलेन निर्माण का ऐलान हुआ था। एक साल की समय सीमा तय की गई है, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी काम में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो सकी है। निर्माण एजेंसियों ने शुरुआती स्तर पर साइड चौड़ीकरण शुरू किया था, पर बिजली के खंभे, लाइट पोल और अतिक्रमण हटाने में देरी से मशीनें बंद पड़ी हैं और श्रमिकों को काम रोकना पड़ा है। सबसे बड़ी अड़चन करीब 650 पेड़ों की कटाई है, जो टीटीजेड क्षेत्र में होने के कारण अब तक नहीं हो सकी। पेड़ और खंभे हटे बिना चौड़ीकरण संभव नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से करोड़ों रुपये की परियोजनाएं महीनों से ठप हैं । टीटीजेड प्राधिकरण से लेनी होगी अनुमति,सुप्रीम कोर्ट की होगी निगरानी:- ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन आगरा स्थित ताजमहल और आसपास के ऐतिहासिक स्मारकों को वायु प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिभाषित 10,400 वर्ग किलोमीटर का पर्यावरण‑ संवेदनशील क्षेत्र है। इस क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए नियम बेहद सख्त हैं। पेड़ों की कटाई की अनुमति टीटीजेड प्राधिकरण और वन विभाग संयुक्त रूप से देते हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी रहती है। नियम के अनुसार जितने पेड़ काटे जाते हैं, उसके दस गुना पेड़ पहले उसी क्षेत्र में लगाना अनिवार्य है। यही शर्त परियोजना के भविष्य को तय करेगी। फोरलेन निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी के सर्वे में करीब 650 पेड़ों की कटाई अनिवार्य बताई गई है। नियमानुसार इनकी भरपाई के लिए 10 गुना यानी लगभग 6 हजार नए पेड़ लगाने होंगे। पौधारोपण टीटीजेड क्षेत्र की निर्धारित भौगोलिक सीमा के भीतर ही किया जाएगा। परियोजना का भविष्य अब ज़िला प्रशासन के हाथ में है, क्योंकि वन विभाग को समय रहते भूमि उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। इन पौधों के लिए कई हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता पड़ेगी और यदि यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई तो फोरलेन निर्माण कार्य और अधिक विलंबित हो सकता है। लाइट और बिजली के खंभों को शिफ्ट करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा गया है। इनके हटने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।” — आर.सी. मीना, एसई, सार्वजनिक निर्माण विभाग -आर.सी. मीना, एसई, सार्वजनिक निर्माण विभाग।


