एक और लापरवाही उजागर…:टाइल्स लगाई, लेकिन पानी नहीं भरा, न इंजीनियर देखने पहुंचे, न ठेकेदार

6 करोड़ रुपए से रिनोवेट हो रहे नेहरू पार्क स्विमिंग पूल का काम करीब एक साल से चल रहा था, लेकिन इसकी गुणवत्ता जांचने न इंजीनियर पहुंचे और न ही ठेकेदार। उद्‌घाटन से करीब 20 दिन पहले जब अधिकारी इसका निरीक्षण करने पहुंचे तो पता चला कि टाइल्स लगाने व केमिकल करने के बाद इसमें 7 दिन तक पानी भरकर रखना था, लेकिन किसी ने पानी ही नहीं भरा, नतीजा टाइल्स फूल गईं। अब दोबारा इसे सुधारा जा रहा है। इसमें करीब 1 महीने का समय लगेगा। वैसे 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर इसका शुभारंभ होना था, जो संभव नहीं है। 7 साल पहले भी हुआ था रिनोवेशन
पूर्व सभापति अजय सिंह नरुका ने 35X15 मीटर के स्विमिंग पूल को 7 साल पहले 65 लाख रुपए की लागत से रिनोवेट किया था। इस काम को पूरा करने में चार महीने लगे थे। पूल को इंटरनेशनल स्तर का बनाने के लिए रिनोवेशन किया था। लेकिन पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण उसे इंटरनेशनल लेवल का नहीं बनाया जा सका। इसके बाद ही पीपल्याहाना पर इंटरनेशनल स्तर का पूल बनाया गया। टाइल्स टूटी तब खुली नींद
टाइल्स फूलने की घटना के बाद नगर निगम के जिम्मेदारों की नींद खुली और वे मौका देखने पहुंचे। अहम बात यह है कि निगम ने 25 को इसका उद्घाटन करने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां कर ली थीं। अब वह कार्यक्रम भी उलझन में है। इस पूरे मामले में निगम अफसरों व ठेकेदार की भूमिका जांच रहा है। इस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जिस ठेकेदार को यह काम दिया गया था, उसे इसका अनुभव है या नहीं। भास्कर एक्सपर्ट – भागीरथ राठौर, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट टाइल्स लंबे समय तक धूप-बारिश व हवा झेलती रही’, इससे फूल गई पूल बनाने में पहले नीचे कांक्रीट डालकर लेवल किया जाता है। उस पर सीमेंट की एक परत चढ़ानी होती है। इसके बाद स्विमिंग पूल में टाइल्स लगाने के लिए खास पॉलिमर-मॉडिफाइड टाइल एडहेसिव (टाइल चिपकाने का केमिकल) और एपॉक्सी ग्राउट (टाइल की गैप भरने का केमिकल) का इस्तेमाल होता है। यह पानी, क्लोरीन और तापमान के बदलाव को झेलने में सक्षम होता है। पूल की टाइल चिपकाने के लिए सामान्य सीमेंट ठीक नहीं रहता। टाइल्स के बीच की खाली जगह भरने के लिए एपॉक्सी ग्राउट का इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह वाटरप्रूफ होता है और फंगस लगने से रोकता है। टाइल लगाने के 24 घंटे बाद केमिकल सेट होने पर पूल में पानी भरा जाता है। इसे करीब 7 दिन तक भरकर रखा जाता है। इससे पता चलता है कि कहीं पूल में कोई लीकेज तो नहीं। नेहरू पार्क के स्विमिंग पूल के मामले में यह आशंका है कि एडहेसिव लगाने के बाद टाइल तो चिपका दी गईं, लेकिन इसमें पानी भरकर नहीं रखा गया। पूल की टाइल्स लंबे समय तक धूप-बारिश का पानी और हवा झेलती रहीं। इसके कारण यहां टाइल्स की गैप में धूल भर गई होगी। यही कारण है कि एडहेसिव का असर कम होने से टाइल फूल गई होंगी। ये भी अधर में… 1. अटल परिसर : शुरू नहीं हो सका स्विमिंग पूल
20 साल पहले स्कीम नं. 78 स्थित अटल परिसर में 2 करोड़ की लागत से स्विमिंग पूल बनाया गया। पूल बनाते समय गहराई के मापदंडों का ध्यान नहीं रखा गया। जिसके कारण खिलाड़ी और आमजनों के लिए यह असुरक्षित पाया गया। यहां पानी साफ करने के लिए फिल्टर प्लांट भी नहीं बनाया था। इस कारण यह स्विमिंग पूल आज तक शुरू नहीं हो सका।
2. विश्राम बाग स्विमिंग पूल आठ साल से अधूरा
विश्राम बाग में इंटरनेशनल स्तर का स्विमिंग पूल आठ साल से तैयार किया जा रहा है। 11 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे पूल को पूरा होने का अब भी इंतजार है।

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