फिर सवालों में सिस्टम:कलेक्टर, निगमायुक्त और ट्रैफिक डीसीपी पेश हुए, डिवाइडर लगाने के लिए मांगा तीन महीने का समय, कोर्ट ने कहा-जल्दी करें

शहर के बिगड़ते ट्रैफिक और बीआरटीएस से जुड़ी परेशानियों पर हाई कोर्ट की चिंताओं और फटकार के बाद भी अफसर इसके प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं हैं। बुधवार को इससे जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई में अफसरों ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के काम में व्यस्तता के चलते पेशी से छूट मांगी। प्रशासनिक जज विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोदकुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने उनकी मांग ठुकराते हुए कहा, कोर्ट में उपस्थित होना ही होगा। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त दिलीप यादव और ट्रैफिक डीसीपी आनंद कलादगी कोर्ट में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिर दोहराया कि जब भोपाल में रैलिंग हटाने का फैसला हुआ तो महज 9 दिन में इसे पूरी तरह हटाकर रोड को चौड़ा कर दिया गया। वहीं इंदौर में फरवरी में आदेश हुआ। 10 महीने होने आए अभी भी एक ही हिस्से में रैलिंग हट पाई है। मामले में अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया पैरवी कर रहे हैं। कोर्ट रूम लाइव… पीठ ने पूछा- रोड मूल स्वरूप में कब तक आएगा? ​​​​​कमेटी ने भी रिपोर्ट पेश की: हाई कोर्ट ने मॉनिटरिंग के लिए 5 वकीलों की कमेटी गठित की थी। कमेटी ने पिछले दिनों बीआरटीएस का दौरा किया था। कमेटी ने रिपोर्ट में लिखा कि एक हिस्से में रैलिंग हटाने, पैचवर्क करने का काम तो अच्छा हुआ है, पर दूसरे हिस्से में काम ही शुरू नहीं हुआ। इसे हटाकर डिवाइडर लगाना होंगे। काम बहुत धीमी गति से हो रहा है। एयरपोर्ट रोड ट्रक हादसा: हाई कोर्ट ने कहा- रिपोर्ट पर अमल भी करें एयरपोर्ट रोड पर नो एंट्री में घुसे ट्रक से हुए भीषण हादसे पर जबलपुर हाई कोर्ट में बुधवार को फिर सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार और परिवहन विभाग ने कोर्ट में दुर्घटनाएं रोकने के लिए कुछ सुधारात्मक प्रयास की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि इंदौर शहर के प्रत्येक एंट्री प्वॉइंट और यातायात में सुधार के लिए एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) तैयार की गई है। इसके तहत हर एंट्री पर पुलिस व ट्रैफिक पुलिस की तैनाती सुनिश्चित की गई है। चेकिंग प्वॉइंट पर प्रत्येक कर्मी के पास मॉडर्न उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं शहर के सामान्य यातायात को व्यवस्थित करने के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। इस पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने निर्देश दिए कि इन पर कड़ाई से अमल भी किया जाए। अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।

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