छात्र पढ़कर निकले…:कॉलेज अब मांग रहा एक करोड़ की फीस, डिग्री व टीसी नहीं दे रहे

इंदौर कृषि कॉलेज में पिछले पांच साल से फीस और रिकॉर्ड के मामले में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। कॉलेज का कहना है कि साल 2019 से 2024 तक पढ़े यूजी और पीजी के करीब 1500 से ज्यादा छात्रों पर कॉलेज की 1 करोड़ से ज्यादा की फीस बकाया है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि कॉलेज के पास इन छात्रों का कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। कॉलेज प्रबंधन अब छात्रों से ही रसीद मांग रहा है कि उन्होंने कब और कितनी फीस जमा की थी। जिन छात्रों की फीस जमा हो चुकी थी, लेकिन रसीद कहीं गुम हो गई, उन्हें अपनी डिग्री और टीसी लेने में महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। क्योंकि कॉलेज इस स्थिति में यूनिवर्सिटी से जानकारी मांगता है। वहां से जानकारी आने में करीब 2 महीने से ज्यादा समय लग जाता है। कॉलेज के अनुसार, अगर कोई छात्र यह साबित नहीं कर पाता कि उसने फीस जमा की थी तो उसे बकाया राशि जमा करने के बाद ही दस्तावेज मिलेंगे। उधर, छात्रों का कहना है कि फीस बाकी थी तो परीक्षा के पहले बता देते। भास्कर ने ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) के अधिकारियों से बात की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि शासन का नियम है कि छात्रों को फीस जमा न करने के आधार पर पढ़ाई से रोका नहीं जा सकता। मालूम हो कि यूजी और पीजी छात्रों से प्रति सेमेस्टर के हिसाब से फीस ली जाती है। एडमिशन की प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
कॉलेज में रजिस्ट्रेशन फॉर्म फीस जमा करने के बाद ही जारी किया जाता है। छात्र इसे संबंधित प्रोफेसर से साइन करवा कर अकादमिक शाखा में जमा करवाते हैं। सवाल उठता है कि बिना फीस जमा किए छात्रों को रजिस्ट्रेशन फॉर्म कैसे मिले। यूनिवर्सिटी जांच करा रही
विश्वविद्यालय ने मामले में जांच समिति गठित की है। इस समिति में कुछ सदस्य शासन स्तर और कुछ सदस्य यूनिवर्सिटी स्तर पर नियुक्त किए गए हैं। समिति ने इंदौर कृषि कॉलेज से सभी दस्तावेज मांगे हैं। कॉलेज प्रबंधन ने अभी तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए हैं। सीधी बात – प्रो. डॉ. अरविंद कुमार शुक्ला, कुलगुरु, RVSKVV बाकी फीस जमा करने को कहा है स्टूडेंट्स की फीस के करीब 1 करोड़ रुपए 5 साल से बाकी हैं और वो पासआउट हो गए?
– बच्चों को फीस के आधार पर पढ़ाई से वंचित नहीं कर सकते, शासन का नियम है। जिनकी भी फीस बाकी है, उन्हें जमा करने कहा है। 1500 स्टूडेंट्स डिग्री-टीसी के लिए परेशान हो रहे हैं, उनसे रसीदें मांगी जा रही हैं। कॉलेज के पास रिकॉर्ड ही नहीं है?
-स्टूडेंट्स से लिखित में लेकर डिग्री और टीसी जारी कर रहे हैं। जांच के बाद फीस के लिए सूचित कर देंगे। अभी किसी को रोक नहीं रहे हैं। कॉलेज के पास रिकॉर्ड नहीं है इसकी जांच होगी। विवि प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
-हमने 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है, इसमें फाइनेंस और एडमिनिस्ट्रेशन के लोगों को लिया है वो जांच करेंगे, दोषियों पर कार्रवाई हम करेंगे।

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