दो सगी बहनों के साथ देह शोषण करने के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस और पक्ष सुनने के बाद दोनों आरोपियों को जिंदा रहने तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। बाड़मेर में यह पहला मामला है, जब पॉक्सो कोर्ट बालोतरा ने दोनों आरोपियों को पॉक्सो एक्ट 2012 के तहत आजीवन जेल में रहने और 20-20 हजार रुपए का आर्थिक दंड देने सजा सुनाई है। साथ ही पीड़िताओं को 5-5 लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए है। साढ़े पांच साल बाद दोनों युवकों को कोर्ट ने सजा सुनाई है। दरअसल, 2 जून 2020 को एक व्यक्ति ओर उसकी दो बेटियों ने महिला थाने में दी रिपोर्ट में बताया कि उनकी तीन बेटियां है, जिनकी उम्र 17 वर्ष, 15 वर्ष और 13 वर्ष है। 2019 में दो बेटियां कक्षा सातवीं में पढ़ती थी, तभी से आरोपी तनवीर और नरेश इनका पीछा करते थे। स्कूल जाने और घर लौटने के दौरान पीछा, गलत कमेंट व अश्लील इशारे कर परेशान किया। इसके बाद इन्हें स्कूल छुड़वा दी और घर पर ही पढ़ने को कहा। इसके बाद भी आरोपियों ने बालिकाओं को पीछा नहीं छोड़ा। 1 जून 2020 को एक पीड़िता ने मां को बताया – आरोपी नरेश ने उसे बहला फुसलाकर शादी का झांसा दिया है। एक साल से रेप कर रहा है। नरेश नाबालिग को घर ले जाता था और रेप करता था। नरेश ने उसे एक मोबाइल भी दिया है, जो उसके पास था। पुलिस ने में मामला दर्ज किया। दोनों नाबालिगों का मेडिकल करवाया। एफएसएल के लिए सैंपल भेजे। इसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले में पीड़ित पक्ष से विशिष्ट लोक अभियोजक रमेश कच्छवाहा व वरिष्ठ अधिवक्ता करनाराम चौधरी ने पैरवी की। विशिष्ट न्यायाधीश, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 एवं बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 बालोतरा ने एक मामले में दो आरोपियों को जिंदा रहने तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। पीड़िता के वकील करनाराम चौधरी ने बताया- विशिष्ट न्यायाधीश राजेंद्र बंशीवाल ने आरोपी नरेश उर्फ नरेंद्र कुमार व तनवीर पुत्र लेखराज को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों आरोपियों को 20-20 हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया है। इसमें 6 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। दोनों पीड़िताओं को 5-5 लाख रुपए बतौर क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए। 2 लाख रुपए पीड़िताओं के राष्ट्रीकृत बैंकों में दो वर्ष की अवधि के लिए सावधि जमा खाते में जमा करवाई जाए। शेष 3 लाख रुपए प्रत्येक पीड़िता के बचत खाते में जमा करवाई जाए। मरने तक जेल में रहने का पहला मामला है।


