सीएम ने आत्मनिर्भर मप्र का संकल्प पेश किया‎:लाल सलाम को आखिरी सलाम कर चुके, अब जबलपुर-ग्वालियर को मेट्रोपॉलिटन बनाएंगे

विधानसभा के विशेष सत्र में सीएम डॉ. मोहन यादव ने आत्मनिर्भर मप्र बनाने का संकल्प पेश किया। डॉ. यादव ने कहा कि सालों तक बीमारू राज्य की पहचान को मप्र ने भाजपा के राज में पीछे छोड़कर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा है। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में मप्र ने 11 दिसंबर को लाल आतंक को आखिरी सलाम कर दिया है। इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र गठित किए हैं। अब 2026 में जबलपुर और ग्वालियर को भी मेट्रोपॉलिटन एरिया बनाएंगे। पीएम मित्रा पार्क से मालवा निमाड़ के कपास उत्पादक किसानों को उनका हक दिलाएंगे। विकास और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं। श्रीकृष्ण पाथेय, अद्वैत लोक बनाकर धार्मिक पर्यटन से विकास की राह पर चलेंगे। 2024 को गौसंरक्षण, 2025 को औद्योगिक विकास और 2026 को कृषि उद्योग वर्ष के रूप में मनाएंगे। 5 साल में बजट दोगुना करेंगे। अभी 14 से 15 प्रतिशत की गति से हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। 2026 में सुगम परिवहन सेवा शुरू कर देंगे। विशेष सत्र के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम में मौजूद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और मंत्री राकेश सिंह व अन्य। विकसित मप्र के विज़न पर 10 साल बाद यह विशेष सत्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शुरुआत करते हुए कहा कि मप्र विस की 70वीं वर्षगांठ पर विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश के विज़न और प्रदेश की 8 करोड़ जनता की आकांक्षाओं और अभिलाषाओं पर चर्चा के लिए विशेष सत्र आयोजित है। नेक इरादे, साफ नीयत, जनहित और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर हम जनता की भलाई के लिए एक नया इतिहास लिखेंगे। लगभग 10 साल बाद इस विषय पर हम विशेष सत्र में बैठे हैं। अपनी स्थापना के 69 वर्षों के दरम्यान कुल 191 बार सदन के सत्र आहूत हुए हैं। 192वीं बैठक के रूप में आहूत 16वीं विधानसभा का यह विशेष है। बीते 70 वर्षों में मप्र में पक्ष और विपक्ष के कुल 4499 विधायक निर्वाचित हुए हैं। 8 बार बुलाए गए हैं विस के एक दिनी विशेष सत्र प्रदर्शनी : विस परिसर में स्थापना के 69 वर्ष के उपलक्ष्य में चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। राज्यपाल मंगुभाई पटेल व सीएम ने किया। मंत्री प्रहलाद पटेल ने सुझाव दिया कि जब पांच साल बाद मप्र विस के 75 वर्ष पूरे होंगे, तब भी एक विशेष सत्र होना चाहिए।

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