मकर संक्रांति से पहले, PETA इंडिया और आश्रय फाउंडेशन ने शुक्रवार को एक अनूठे तरीके से पक्षियों की सुरक्षा का संदेश दिया। जयपुर के अल्बर्ट हॉल पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान, एक समर्थक खून से सने और “कांच-लेपित मांझे” में फंसे पक्षी की पोशाक पहनकर एक विशाल पतंग के साथ नजर आया। पतंग पर लिखा था, “कांच लेपित मांझा पक्षियों के पंख काट देता है” और “जानलेवा मांझे का इस्तेमाल न करें।” इस अभियान में SRN इंटरनेशनल स्कूल के छात्रों ने भी भाग लिया और जनता से अपील की कि वे पतंगबाजी के दौरान केवल सादे सूती धागों का उपयोग करें। इस दौरान, यह संदेश दिया गया कि कांच से लेपित तेज़ धार वाले नायलॉन मांझे का उपयोग पक्षियों और इंसानों के लिए बेहद खतरनाक है। जानलेवा मांझे के खतरे
PETA इंडिया के कैंपेन कॉर्डिनेटर अथर्व देशमुख ने बताया कि धारदार मांझे के कारण हर साल हजारों पक्षी घायल हो जाते हैं या अपनी जान गंवा देते हैं। यह मांझा केवल पक्षियों के लिए ही नहीं, बल्कि इंसानों के लिए भी घातक साबित होता है। देशभर में हर साल कई लोग मांझे से घायल होते हैं, जिनमें से कुछ की मौत भी हो जाती है। उन्होंने कहा- मांझे के कारण मनुष्यों और पशुओं को गंभीर चोटें आती हैं। पतंगबाजी के लिए केवल सादे सूती धागों का उपयोग करके इन हादसों को रोका जा सकता है। मांझे से पर्यावरण को नुकसान
धारदार नायलॉन मांझा न केवल जानलेवा है, बल्कि यह पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है। ये सामग्रियां सालों तक पर्यावरण में बनी रहती हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। इसके अलावा, मांझे के कारण बिजली कटौती जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। सरकार और PETA की पहल
PETA इंडिया की अपील के बाद, केंद्र सरकार की वैधानिक संस्था ‘भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड’ ने राज्यों को कांच-लेपित मांझे पर प्रतिबंध लगाने और सादे सूती धागे के उपयोग को प्रोत्साहित करने की सलाह दी है। कई राज्यों ने इस पर कदम उठाते हुए अधिसूचनाएं जारी की हैं। PETA इंडिया ने प्रजातिवाद का विरोध करते हुए कहा कि पशु भी इस धरती पर सम्मानपूर्वक जीने के अधिकार रखते हैं। संगठन ने जनता से अपील की कि वे मकर संक्रांति के दौरान जानलेवा मांझे का उपयोग न करें और पक्षियों व पर्यावरण की सुरक्षा में अपना योगदान दें।


