उज्जैन के भड़ला में बच्चों को स्कूल भवन का इंतजार:12 साल में नहीं बन पाया भवन,बुजुर्ग की दहलान में पांच कक्षाओं को एक साथ पढ़ा रहे शिक्षक

सांदीपनि स्कूल पर करोड़ों रुपए खर्च करने वाली मध्य प्रदेश सरकार ग्राम भड़ला (प्रेम नगर नई आबादी) में एक अदद प्राइमरी स्कूल भवन नहीं बना पा रही है। हालात ऐसे हैं कि पहली से पांचवीं तक के बच्चों को पहले झोंपड़ी और अब गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग अंबाराम परमार की दहलान (ओटला) में बैठकर भविष्य के सपने बुनने पड़ रहे हैं। इस गांव के लोगों और बच्चों को साल 2013 से स्कूल भवन का इंतजार है। परमार भी राष्ट्रपति, पीएम, सीएम तक फरियाद कर चुके हैं। गांव में साल 2013 में सरकारी प्राइमरी स्कूल स्वीकृत हुआ था। दो शिक्षकों की नियुक्ति भी हुई पर भवन नहीं था। शिक्षकों ने झोंपड़ी में कक्षाएं प्रारंभ कीं। जब झोंपड़ी में बैठना मुश्किल हुआ, तो बुजुर्ग अंबाराम परमार ने कहा कि मेरे ओटले पर कक्षाएं लगा लो। अब 29 बच्चे (सभी कक्षाएं एक साथ) ओटले पर बैठकर पढ़ रहे हैं। गांव की समस्या सिर्फ स्कूल नहीं है, गांव तक रास्ता भी बड़ी परेशानी है। सड़क न होने से स्कूल में बच्चों की संख्या भी नहीं बढ़ रही है। सभी बच्चों को एक साथ पढ़ाना पड़ रहा शिक्षक हंसा बैरागी ने बताया कि वर्ष 2013 से स्कूल की शुरुआत हुई थी। पहले झोपड़ी में पढ़ाई कराई गई, अब बच्चों को अंबाराम परमार के घर के आंगन में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। शिक्षक मनोज दास ने बताया कि वे दोनों शिक्षक स्कूल में हैं, लेकिन बारिश और खराब सड़क के कारण बच्चों का आना-जाना मुश्किल है। अधूरा भवन पूरा होने का इंतजार ऐसा नहीं कि स्कूल भवन के लिए पहल नहीं हुई। गांव को भवन भी मिला, पर पैसों के अभाव में पूरा नहीं बन पाया। भवन बनाने के लिए समय-समय पर राशि न मिलने के कारण ठेकेदार ने काम छोड़ दिया और भवन अधूरा ही रह गया। वह भी अब खंडहर हो चुका है। परमार ने दिए 81 आवेदन अंबाराम परमार गांव के बच्चों को पढ़ाने के लिए इस कदर संकल्पित हैं कि खुद की दहलान देने के साथ वे लगातार स्कूल भवन की मांग कर रहे हैं। परमार 81 आवेदन सौंप चुके हैं पर किसी पर सुनवाई नहीं हुई। अपनी बात को प्रभावी तरीके से शासन तक पहुंचाने के लिए परमार पहले आवेदनों की माला गले में पहनकर अधिकारियों तक पहुंचे और फिर 15 दिसंबर को गांव से पैदल यात्रा शुरू की और 17 दिसंबर उज्जैन कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों को आवेदन सौंपा। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि गरीब, पीड़ित और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के बच्चों के लिए कई बार स्कूल भवन निर्माण का आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। परमार ने कहा, “भवन अधूरा और खंडर होने की स्थिति में बच्चों को मैं अपने घर में पढ़ा रहा हूं। प्रशासनिक अधिकारियों ने आवेदन लेकर उच्च अधिकारियों तक बात पहुंचाने का आश्वासन दिया है।”

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