जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे है। यहां सुरक्षा गार्डो की नियुक्ति करने वाली एजेंसी ऐसे सुरक्षा गार्ड नियुक्त कर रही है, जो दिन में शराब के नशे में रहते है और यहां आने वाले मरीजों को इलाज के बजाए वापस घर जाने के बाद बोल रहे है। ऐसा ही मामला आज इमरजेंसी के पास गेट नं. 1 पर देखने को मिला। जहां नशे में धुत एक सुरक्षा गार्ड को ड्यूटी पर लगा रखा था, जो इमरजेंसी में आ रहे कुछ मरीजों को वापस घर जाने या दूसरी जगह दिखाने की बात कहता दिखा। बिमला सुरक्षा एजेंसी की वर्दी में मौजूद इस गार्ड का जब यहां लोगों से विवाद शुरू हुआ तो दूसरी जगह खड़े अन्य सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे और वे उसे पकड़कर इंचार्ज के ऑफिस ले गए। जहां गार्ड से वर्दी लेकर उसे घर भेज दिया। मरीज और परिजनों से हर रोज विवाद वार्ड, आईसीयू और अन्य जगहों पर इन गार्डो से ही सबसे ज्यादा विवाद मरीज और उनके परिजनों का होता है। इसे लेकर कई शिकायतें भी प्रशासन के पास आती है, लेकिन उन शिकायतों का भी निस्तारण जिम्मेदार नहीं करते। न मौके पर पर्याप्त गार्ड, न जिम्मेदार सचेत एसएमएस हॉस्पिटल में इस समय करीब 680 सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति का कॉन्ट्रेक्ट है, जिनको तीन शिफ्टों में तैनात करके सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा सौंप रखा है। इसमें 95 फीसदी सुरक्षा गार्ड बिमला सिक्योरिटी एजेंसी के है, जबकि 5 फीसदी रेस्को सुरक्षा एजेंसी के। लेकिन वास्तविकता ये है कि अधिकांश पोइंट्स पर तो गार्डो की नियुक्ति ही नहीं हो रही। ओपीडी का समय पूरा होने के साथ हॉस्पिटल में केवल चुनिंदा स्थानों पर ही सुरक्षा गार्ड तैनात रहते है। इसे लेकर न तो एसएमएस प्रशासन सजग है और न ही जिम्मेदार अधिकारी।


