प्रमोशन में आरक्षण को लेकर दायर याचिकाओं पर हाई कोर्ट में गुरुवार को करीब दो घंटे तक लंबी सुनवाई चली। चीफ जस्टिस संजय सचदेवा की अध्यक्षता वाली डिविजन बेंच के समक्ष राज्य सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े और स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट ने कहा कि यह मामला हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसका शीघ्र निराकरण किया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि 54 विभागों के 1500 कैडर में किसी का प्रमोशन आरक्षण से प्रभावित हुआ है या नहीं? याचिकाकर्ताओं ने वेटरिनरी, पीएचई, मेडिकल एजुकेशन, फॉरेस्ट, उद्यानिकी और मंत्रालय विभागों का उदाहरण देते हुए ऐसा नहीं बताया। पर सरकार ने जरनैल सिंह-2 फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिनिधित्व कैडर-वाइज होना चाहिए। अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी। प्रमोशन पर रोक के कारण तीन लाख पद खाली हैं
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता के. वैद्यनाथन ने बताया कि प्रदेश में कुल 9.50 लाख पद स्वीकृत हैं। इनमें 6.45 लाख पर कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रमोशन पर रोक के कारण लगभग 3 लाख पद खाली हैं। वर्ग-2 और वर्ग-4 के करीब 2.90 लाख कर्मचारियों का प्रमोशन लंबे समय से अटका हुआ है।


