निगम में लंबे समय से रजिस्टर में हाजिरी लगाकर ड्यूटी से गैरहाजिर रहने का खेल चल रहा

शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर निगम में लंबे समय से रजिस्टर में अटेंडेंस लगा मुलाजिमों के ड्यूटी से गैरहाजिर रहने का खेल चल रहा था। निगम कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल की अचानक अटेंडेंस चेक करने के लिए की गई छापेमारी में एचओडी और मुलाजिमों की पोल खुलकर सामने आ रही है। निगम कमिश्नर ने बड़ा एक्शन लेते हुए असिस्टेंट कमिश्नर समेत 39 को कारण बताओ नोटिस जारी किया जिसमें 18 मुलाजिम संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। जिन्हें कमिश्नर ने पर्सनल हियरिंग के लिए दफ्तर बुलाया। सूत्रों के मुताबिक, अंदरखाते हियरिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। गैरहाजिर रहने का ठोस जवाब न दे पाने वाले मुलाजिमों पर विभागीय एक्शन हो सकता है। असिस्टेंट कमिश्नर को इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया कि उनके डिपार्टमेंट में मुलाजिम सीट से गैरहाजिर रह रहे हैं और अटेंडेंस लग रही है। ऐसे में बतौर एचओडी वह क्या कर रहे हैं। मुलाजिमों के सीट पर न मिलने को लेकर पार्षदों से लेकर आम लोगों की अकसर शिकायतें होती थी लेकिन चेकिंग या कार्रवाई की बजाए उच्च अफसर और संबंधित ब्रांचों के एचओडी आंखें मूंद लेते थे। बता दें कि निगम कमिश्नर ने बीते मंगलवार सुबह 9:40 बजे अचानक कर्मचारियों की हाजिरी को लेकर चेकिंग की थी। जिसमें सुरिंदर कुमार सेनेटरी सुपरवाइजर की हाजिरी के बावजूद ड्यूटी से गैरहाजिर मिले। जिसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। जबकि पहले बीते 26 अगस्त को कमिश्नर ने ब्रांचों में अचानक छापेमारी कर अटेंडेंस चेक की थी। तब 4 मुलाजिमों को रजिस्टर में अटेंडेंस लगी होने बावजूद ड्यूटी से गैर हाजिर मिलने पर सस्पेंड किया गया था। मगर सख्ती के बावजूद मुलाजिमों पर असर नहीं दिख रहा। वहीं निगम कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह शेरगिल का कहना है कि ड्यूटी से गैरहाजिर रहने पर मुलाजिमों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब-तलबी की गई है। लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीनियर एडवोकेट इंद्रजीत सिंह अड़ी का कहना है कि अगर कोई मुलाजिम ड्यूटी पर हाजिर नहीं है, लेकिन रजिस्टर में साइन कर देता है, तो यह ड्यूटी में लापरवाही-अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार में आता है। चूंकि हो सकता है कि कोई और रजिस्टर में दस्तखत कर रहा हो। ऐसे में पूरे मामले की जांच कराई जानी चहिए। वेतन काटना, शो-कॉज़ नोटिस, निलंबन जैसी कार्रवाई की जाती है। पूरे मामले की जांच करवाई जानी चाहिए। गड़बड़ी मिलने पर कानूनी कार्रवाई भी अफसर कर सकते हैं।

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