जालोर में गैर-कानूनी तरीके से चल रहे ईंट भट्टों को बंद करने की मांग को लेकर लाइसेंस वाले भट्टा मालिकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और बिना अनुमति चल रहे भट्टों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मालिकों का कहना है कि शहर के आसपास के गांवों में कई लोग बिना किसी लाइसेंस या सरकारी मंजूरी के नियमों को ताक पर रखकर भट्टे चला रहे हैं। उनका आरोप है कि नियमों का पालन करने वाले संचालकों को नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध भट्टे प्रशासनिक उदासीनता के चलते बेखौफ चल रहे हैं। बिना लाइसेंस चल रहे भट्टों पर सवाल ज्ञापन में लाइसेंसधारी ईंट भट्टा मालिकों ने बताया कि जालोर शहर के आसपास के कई गांवों में बिना किसी लाइसेंस और सरकारी स्वीकृति के ईंट भट्टे संचालित किए जा रहे हैं। इन भट्टों के संचालकों ने न तो प्रदूषण नियंत्रण विभाग से अनुमति ली है और न ही माइनिंग विभाग की मंजूरी हासिल की है। इसके बावजूद खुलेआम ईंट निर्माण का काम किया जा रहा है। नियमों का पालन, फिर भी नुकसान भट्टा संचालकों का कहना है कि वे सभी सरकारी नियमों का पालन करते हुए, आवश्यक लाइसेंस और स्वीकृतियों के साथ ईंट भट्टों का संचालन कर रहे हैं। जमीन का रूपांतरण कराना, पर्यावरण संबंधी शर्तों का पालन करना और विभागीय अनुमति लेना उनके लिए अनिवार्य है। वहीं अवैध संचालक इन सभी नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं, जिससे वैध भट्टा मालिकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। पर्यावरण को हो रहा भारी नुकसान ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि कई अवैध ईंट भट्टों पर नियमों के खिलाफ लोहे की चिमनियां लगी हुई हैं। इन चिमनियों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। लाइसेंसधारी संचालकों का कहना है कि इस संबंध में अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कई गांवों में अवैध भट्टों का संचालन संचालकों के अनुसार बिशनगढ़, आंवलोज, वीराना, धनजी का बाड़ा, बिबलसर, नून, दादाल, बागोड़ा सहित कई गांवों में अवैध ईंट भट्टे चल रहे हैं। विभागीय उदासीनता के कारण अवैध संचालक नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं और प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर उनमें नजर नहीं आ रहा। कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग लाइसेंसधारी ईंट भट्टा संचालकों ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश देकर अवैध ईंट भट्टों पर सख्त कार्रवाई करवाई जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी संभव हो सकेगा और वैध संचालकों को हो रहे आर्थिक नुकसान पर भी रोक लगेगी।


