जयपुर-अजमेर हाईवे पर 20 दिसंबर को हुआ भीषण अग्निकांड 20 जिंदगियां ले चुका है। हादसे के दौरान एक जलते व्यक्ति का वीभत्स वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उस व्यक्ति की अंतिम आवाज थी- ‘मुझे बचा लो..गाड़ी में ले चलो… किराया मैं दे दूंगा…’ कई घायलों ने ऐसे ही दम तोड़ा। हादसों में झुलसे लोगों को तुरंत इलाज मिलना चाहिए, क्योंकि वो मरीज के लिए गोल्डन ऑवर्स होते हैं। इसके बावजूद 108 एंबुलेंस मरीजों को 16 किमी दूर एसएमएस ही लेकर गईं, जबकि डेढ़ किमी में 50 बेड के 5 अस्पताल थे, यहां 5 मिनट में पहुंच सकते थे। 20 मरीज खुद निजी अस्पतालों में पहुंचे भी। सरकार का 108 एंबुलेंस से जो करार है, उसमें शामिल शर्त की वजह से एंबुलेंस नजदीकी अस्पतालों में नहीं जाती है।
शेष | पेज 4 एनएचएम के स्टेट नोडल ऑफिसर सुवालाल बताते हैं- 108 एंबुलेंस सर्विस को केवल सरकारी अस्पतालों में लेकर जाना होता है। (करार में है कि अधिकृत निजी अस्पतालों भी ले जा सकते हैं, ऐसी कोई सूची होगी ना? अधिकृत जैसी कोई सूची नहीं है। बना देंगे तो फिर यह सिर्फ वहीं लेकर जाएंगे। गोल्डन ऑवर्स में जान बचाना बेहद जरूरी, फिर भी प्राइवेट या सरकारी के बीच फंसी जिंदगियां एंबुलेंस ड्राइवर कहते हैं- हमें सरकारी हॉस्पिटल में ले जाने के ही निर्देश हैं “अग्निकांड के वक्त वैशाली नगर में थे। घटना स्थल पहुंचे और 2 राउंड में 4 मरीजों को एसएमएस पहुंचाया। हमें घटनास्थल से एसएमएस पहुंचने में 20 मिनट लगे होंगे। हमें पास के सरकारी हॉस्पिटल या फिर एसएमएस में ही मरीज लेकर जाने के निर्देश हैं।” -रणधीर, ड्राइवर एंबुलेंस “घटनास्थल पर तो 3 मिनट में पहुंच गए थे, क्योंकि भांकरोटा थाने पर ही थे। हम प्राइवेट अस्पताल में नहीं, बल्कि सीधा एसएमएस अस्पताल लेकर गए। 3 राउंड में 5 मरीज लेकर गए। नजदीक में कोई ऐसा हॉस्पिटल नहीं है, जहां बर्न यूनिट हो।”-विनोद, ड्राइवर एंबुलेंस एंबुलेंस का सरकारी करार
अक्टूबर 2021 में 108 इमरजेंसी से करार में क्लॉज 2.2 पर लिखा है कि मरीज को नजदीकी सरकारी अस्पताल में लेकर जाया जाएगा। दूसरे पैरा में है कि मरीज की स्थिति को देखते हुए सरकारी, ट्रोमा सेंटर या अधिकृत निजी अस्पतालों में ले जाया जाए। यह स्पष्ट नहीं कि अधिकृत अस्पताल कौनसे हैं। इसलिए 108 एंबुलेंस सरकारी अस्पतालों में मरीज ले जा रही है। जब यह सर्विस शुरू हुई तब ऐसी शर्त नहीं थी, एंबुलेंस नजदीकी सरकारी या निजी अस्पतालों में मरीज को लेकर जाती थी। प्राइवेट हॉस्पिटल्स ने बताया- प्राइवेट गाड़ियों से जो मरीज आए उन्हें फर्स्टएड दिया, जो उस समय बहुत जरूरी होता है हमारे पास प्राइवेट गाड़ी और प्राइवेट एंबुलेंस से 12 मरीज आए थे। तीन मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया, अन्य को फर्स्ट एड जैसे- टिटनेस, दर्द की दवा, बर्न ऑइंटमेंट करके एसएमएस भेजा।
-डॉ. बी.पी. कन्दोई, कन्दोई हॉस्पिटल हमारा 50 बेड का हॉस्पिटल है, लेकिन बर्न वार्ड नहीं है। आग की चपेट में आने वाले 4 मरीज पहुंचे थे। जिन्हें फर्स्टएड देकर एसएमएस रैफर कर दिया गया था।
-डॉ. अभिमन्यु सिंह नागा, आयुष हॉस्पिटल हमारा हॉस्पिटल घटनास्थल से डेढ़ किमी दूर है। 4 मरीज आए थे। 1 को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेजा, 3 को एसएमएस भेजा।
– डॉ. मोहन सिंह दुलेट, दुलेट हॉस्पिटल हमारे यहां बर्न वार्ड नहीं है, लेकिन 50 बेड का हॉस्पिटल है तो फर्स्ट एड तो दे ही सकते हैं। तड़पते मरीज को इतना भी बहुत होता है।
-डॉ. वरुण भात्रा, अशोक हॉस्पिटल


