फैमिली कोर्ट सख्त:जेल जाने के डर से भरण-पोषण का बकाया चुकाने लगे पति; पत्नियों का जितने माह का भरण-पोषण बकाया

पारिवारिक विवाद से जुड़े मामलों में कोर्ट के आदेश के बाद भी कई वर्षों तक पतियों द्वारा पत्नियों-बच्चों को भरण-पोषण की राशि नहीं दी जाती। ऐसे कई मामले हैं, जिनमें 15 साल से यह राशि बकाया है और पत्नियां कोर्ट में चक्कर काट रही हैं। लेकिन जब से फैमिली कोर्ट के जज पवन कुमार गर्ग व वीरेन्द्र कुमार जसूजा सहित अन्य जजों ने सख्ती बरतते हुए पतियों को सजा के वारंट जारी करना शुरू किए हैं पति भरण-पोषण की राशि चुकाने लगे हैं। कुछ मामलों में तो पतियों ने राजीनामा करते हुए एक मुश्त राशि दे दी है। कुछ ने न केवल अंतरिम राशि दी, बल्कि अंतिम भरण-पोषण राशि का भुगतान भी कर दिया। वारंट मिलते ही किसी ने 4 लाख दिए तो किसी ने 16 लाख में राजीनामा कर लिया केस 1- कोर्ट ने कृषि कार्य करने वाले पति को डेढ़ साल पहले पत्नी को भरण-पोषण राशि देने के लिए कहा था, लेकिन उसने पालना नहीं की। इस पर कोर्ट ने पति के खिलाफ जितने महीनों का बकाया था उतने महीने के सिविल कारावास का वारंट जारी कर दिया। वारंट जारी होते ही पति ने पत्नी को 4लाख दे दिए। केस 2- कोर्ट आदेश के बाद भी 43 माह तक पत्नी को भरण-पोषण राशि नहीं दी। पत्नी की ओर से कोर्ट से आदेश की पालना करवाने व बकाया राशि दिलवाने का आग्रह किया। कोर्ट ने पति को 43 माह के वारंट जारी कर दिए। पति ने बकाया 5.50 लाख में से 1 लाख दे दिए और बकाया जल्द देने का आश्वासन दिया है। केस 3- एक अन्य मामले में निजी व्यवसायी पति के खिलाफ 80 महीने की बकाया राशि के वारंट थे। पत्नी के पति पर 8 लाख रुपए बकाया थे। कोर्ट की सख्ती के चलते पति ने 16 लाख रुपए में पत्नी से राजीनामा कर लिया। केस 4- भरण पोषण राशि बकाया के एक अन्य मामले में पति लंबे समय से पत्नी को बकाया राशि नहीं दे रहा था। तब कोर्ट ने वारंट जारी कर दिए। पुलिस पति को वारंट पालन में पकड़कर लाई तो उसने पत्नी को दो लाख रुपए का भुगतान कर दिया। भास्कर एक्सपर्ट : भरण-पोषण भुगतान नहीं देने पर सिविल कारावास का प्रावधान
पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष डीएस शेखावत का कहना है कि भरण-पोषण मामलों में हाईकोर्ट ने पूर्व में कहा था कि यदि आदेश के बाद भी पति राशि नहीं दे तो उसे हर महीने के लिए सिविल कारावास दिया जाए। इस आदेश की क्रियान्विति और कोर्ट की सख्ती से कई साल से पेंडिंग केसों में पत्नियों को बकाया राशि मिल रही है। अधिवक्ता विकास सोमानी का कहना है कि इससे न केवल पुराने केसों का निस्तारण हो रहा है, बल्कि महिलाओं व बच्चों को भी कोर्ट से न्याय मिल रहा है।

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