‘IRCTC के कैंसिलेशन नियम एकतरफा और मनमाने’:इजिप्ट टूर कैंसिल मामले में उपभोक्ता आयोग का आदेश, अब 70 फीसदी राशि लौटानी होगी

भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने IRCTC के विदेशी टूर पैकेज को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा है कि कैंसिलेशन के नाम पर उपभोक्ता की जमा राशि पूरी जब्त कर लेना सेवा में कमी और अनुचित व्यवहार की श्रेणी में आता है। IRCTC के कैंसिलेशन नियम एकतरफा और मनमाने हैं और उपभोक्ता की सहमति या नुकसान का कोई वास्तविक आकलन किए बिना पूरी राशि रोकना सेवा में कमी है। इस केस की खास बात यह रही कि फरियादी खुद एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से यह मामला आयोग के सामने रखा। 65 वर्षीय सुनीता चौकसे और उनके पति ने इजिप्ट ‘गिफ्ट ऑफ नील’ टूर पैकेज लिया था। पति-पत्नी दोनों ने IRCTC के टूर के लिए 3,64,800 रुपए पैकेज की राशि जमा की थी। साथ ही IRCTC ने TCS की 18,240 रुपए की राशि भी ली। दंपती ने भोपाल-रायपुर-कोलकाता फ्लाइट टिकटों के लिए 31,000 रुपए खर्च किए, क्योंकि टूर की शुरुआत कोलकाता से होनी थी। मामले में फरियादी मोहन चौकसे न सिर्फ केस के पक्षकार हैं, बल्कि पेशे से अधिवक्ता भी हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि IRCTC से मेरा संबंध नया नहीं है। मैं करीब 10 साल से IRCTC के साथ ट्रैवल कर रहा हूं। सात-आठ इंटरनेशनल ट्रिप्स इनके साथ कर चुका हूं। बड़े-बड़े देशों की यात्राएं की हैं। भरोसा था, इसलिए इस बार भी मिस्र (इजिप्ट) का टूर बुक किया। इजिप्ट टूर की बुकिंग, पूरा भुगतान और टैक्स भी जमा
मोहन चौकसे के मुताबिक, उन्होंने IRCTC के मिस्र टूर पैकेज के लिए करीब 3.60 लाख रुपए का पूरा भुगतान समय पर कर दिया था। साथ ही आयकर से जुड़ी TCS की राशि भी जमा कर दी गई थी। उनका कहना है कि बुकिंग प्रक्रिया में किसी तरह की कोई चूक नहीं थी और सभी भुगतान नियमों के अनुसार किए गए थे। यात्रा की तैयारी पूरी थी, लेकिन परिस्थितियां अचानक बदल गईं। टूर से कुछ दिन पहले पत्नी की तबीयत बिगड़ी
टूर से कुछ दिन पहले मोहन चौकसे की पत्नी की तबीयत अचानक खराब हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और बाद में पेसमेकर लगाया गया। चौकसे बताते हैं कि पेसमेकर लगने के बाद सामान्य रूप से ऐसी जगह यात्रा करना संभव नहीं होता, जहां मशीनों से गुजरना पड़े या लंबी इंटरनेशनल ट्रैवल हो। डॉक्टरों की सलाह के बाद यह तय हो गया कि यात्रा संभव नहीं है। IRCTC ने पैसा लौटाने से किया इनकार
पत्नी की गंभीर स्थिति को देखते हुए मोहन चौकसे ने IRCTC को पत्र लिखकर टूर कैंसिल करने का निवेदन किया और जमा की गई राशि लौटाने का अनुरोध किया। उनका आरोप है कि मेडिकल स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद IRCTC ने कोई सहानुभूति नहीं दिखाई और राशि लौटाने से साफ इनकार कर दिया। हमने कोई मनमर्जी से टूर कैंसिल नहीं किया था, यह मेडिकल मजबूरी थी। 90% रिफंड की मांग, लेकिन कंपनी अड़ी रही
मोहन चौकसे का कहना है कि मैंने आयोग के सामने यह मांग रखी थी कि कम से कम 90% राशि लौटाई जाए। सामान्य तौर पर किसी भी बुकिंग के कैंसिल होने पर 10% कटौती होती है। मैंने यही कहा था कि 10% काट लीजिए, बाकी पैसा लौटा दीजिए लेकिन IRCTC ने यह भी नहीं माना। कंपनी का कहना था कि वे सिर्फ 10% राशि ही लौटाएंगे, लेकिन वह राशि भी वापस नहीं की गई। मजबूरी में उपभोक्ता आयोग की शरण लेनी पड़ी
राशि वापस न मिलने पर मजबूर होकर उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया। मोहन चौकसे ने बताया कि केस के दौरान IRCTC यह तक स्पष्ट नहीं कर पाया कि उनके टूर कैंसिल होने से कंपनी को वास्तव में कितना नुकसान हुआ। न कोई खर्च का हिसाब दिया गया, न यह बताया गया कि कितना पैसा कहां खर्च हुआ। बस नियम दिखा दिए गए। आयोग की सख्त टिप्पणी- नियम एकतरफा, उपभोक्ता की सहमति नहीं
भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनवाई के बाद माना कि IRCTC के नियम पूरी तरह एकतरफा हैं। उपभोक्ता से कभी यह नहीं पूछा गया कि वह इन शर्तों से सहमत है या नहीं। जब कंपनी खुद यह मान रही थी कि 10% राशि लौटाई जा सकती है, तो फिर वह राशि भी वापस न करना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है। 70% राशि लौटाने का आदेश, आयोग का संतुलित फैसला
आयोग ने यह भी माना कि चूंकि कंपनी कोई ठोस हिसाब नहीं दे पाई, इसलिए पूरी राशि रोकना उचित नहीं है। इसी आधार पर आयोग ने 70% राशि लौटाने, मानसिक कष्ट के लिए मुआवजा और वाद व्यय देने का आदेश पारित किया। यह फैसला न तो पूरी तरह कंपनी के पक्ष में गया और न ही पूरी तरह फरियादी के, बल्कि संतुलन के आधार पर दिया गया। IRCTC के इन नियमों पर आयोग ने उठाए सवाल आयोग ने इस पॉलिसी पर कई गंभीर प्रश्न उठाए 1. IRCTC ने यह नहीं बताया कि जमा राशि में से कौन-कौन से खर्च हुए एयर टिकटों और अन्य सेवाओं के वास्तविक खर्च का कोई रिकॉर्ड या हिसाब अदालत में नहीं दिया गया। 2. न एयरलाइंस रिफंड का विवरण दिया और न पैकेज राशि का ब्रेकअप आयोग ने कहा कि IRCTC यह बताने में विफल रहा कि टिकट कैंसिल होने के बाद उन्हें एयरलाइंस से कोई रिफंड मिला या नहीं। 3. एकतरफा नियम पर IRCTC खुद भी पूरी तरह इनका पालन नहीं कर रहा था यदि वास्तव में ‘नो रिफंड’ नीति थी, तो 10% रिफंड की पेशकश कैसे की गई? 4. नियम उपभोक्ता हितों के विपरीत आयोग ने कहा, यह पॉलिसी उपभोक्ता पर एकतरफा ढंग से थोपी गई है और इसे लागू कर पूरी राशि रोकना सेवा में कमी है। IRCTC की सेवा में कमी साबित, 70% राशि वापस करने का आदेश आयोग ने माना कि IRCTC द्वारा 90% राशि काट लेना सेवा में कमी है। इसलिए उपभोक्ता 70% राशि लौटाने का अधिकारी है। आदेश के अनुसार IRCTC को भुगतान करना होगा।

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