उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में संपत्ति विवाद:लक्ष्यराज की बहन ने अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को किया चैलेंज; दिल्ली हाईकोर्ट में चलेगा केस

उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में चल रहा संपत्ति विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में अरविंद सिंह मेवाड़ की वसीयत को चुनौती दी गई है। विवाद पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ के बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और बेटी पद्मजा कुमारी परमार के बीच है। दोनों भाई-बहन के बीच सिटी पैलेस और एचआरएच होटल्स ग्रुप समेत अन्य संपति के हक को लेकर विवाद है। मामले को लेकर 11 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ परिवार के उत्तराधिकारी और एचआरएच ग्रुप आफ होटल के मालिक हैं। लक्ष्यराज और उनकी बहन ने लगाई थी अलग-अलग याचिका
सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने बताया- याचिकाकर्ता उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार से हैं, जो महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ के उत्तराधिकारी थे। परिवार के सदस्यों के बीच उत्तराधिकार और वसीयत की वैधता को लेकर विवाद चल रहा है। अरविंद सिंह मेवाड़ के बेटे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुंबई हाईकोर्ट में लंबित मामलों को राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की है। दूसरी याचिकाकर्ता ने जोधपुर बेंच राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित मामलों को बॉम्बे हाईकोर्ट में भेजने का आग्रह किया है। सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर इन सभी मामलों को दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर दोनों पार्टियों के बीच अन्य कोई मामले लंबित हैं तो उन्हें भी दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया जा सकता है। अरविंद सिंह मेवाड़ के परिवार की PHOTOS… मेवाड़ के पूर्व राज परिवार में लंबे समय से संपत्ति विवाद
भगवत सिंह मेवाड़ के 3 बच्चे महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और बेटी योगेश्वरी कुमारी हुए। भगवत सिंह मेवाड़ ने 1983 में पारिवारिक संपत्तियों को बेचने और लीज पर देने का फैसला किया था। उनका यह फैसला बड़े बेटे महेंद्र सिंह को रास नहीं आया था। वे अपने पिता के खिलाफ कोर्ट चले गए थे। इसके बाद बड़े बेटे से नाराज भगवत सिंह मेवाड़ ने अपनी वसीयत और संपत्ति से जुड़े फैसलों की जिम्मेदारी छोटे बेटे अरविंद सिंह मेवाड़ को सौंप दी थी। इसके बाद महेंद्र सिंह मेवाड़ को ट्रस्ट और संपत्ति से लगभग बाहर कर दिया गया था। 3 नवंबर 1984 को भगवत सिंह के निधन के बाद मेवाड़ के पूर्व राज परिवार का संपत्ति विवाद और गहरा गया था। 37 साल तक कानूनी लड़ाई के बाद 2020 में उदयपुर की जिला अदालत ने फैसला सुनाते हुए विवादित संपत्ति को 4 हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा भगवत सिंह मेवाड़ के नाम और बाकी तीन हिस्से उनकी तीनों संतानों के बीच बांटने के आदेश हुए। कोर्ट के फैसले तक अधिकांश संपत्ति अरविंद सिंह मेवाड़ के कब्जे में रही, जबकि महेंद्र सिंह मेवाड़ और उनकी बहन योगेश्वरी कुमारी को सीमित हिस्सा मिला। कोर्ट ने शंभू निवास पैलेस बड़ी पाल और घासघर जैसी संपत्तियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल रोक लगा दी थी। ये खबर भी पढ़ें बीकानेर पूर्व-राजपरिवार में विवाद,राज्यश्री को किले में घुसने से रोका:बोलीं- भाई की पुण्यतिथि पर मंदिर आई थी, पुलिस ने अंदर जाने से रोका क्या पूर्व राजपरिवार की प्रॉपर्टी कुर्की से विश्वराज संतुष्ट हैं?:रिसीवर नियुक्ति के बाद क्या कर पाएंगे धूणी दर्शन, जानिए विवाद से जुड़े हर सवाल का जवाब विश्वराज मेवाड़ बोले- सांसद-पत्नी से मुलाकात आसान,अपॉइंटमेंट नहीं लेना पड़ता:नाथद्वारा में मीट-शराब बैन हो, उदयपुर पूर्व राजपरिवार विवाद पर कहा- प्रशासन के कारण सब गलत हुआ

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *