जागृत आदिवासी दलित संगठन ने शुक्रवार को बड़वानी जिले के पाटी स्थित तहसील कार्यालय के बाहर केंद्र सरकार के नए रोजगार कानून के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन के कार्यकर्ताओं ने नए विधेयक की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। संगठन ने आरोप लगाया कि यह नया कानून मजदूरों के साथ धोखा है। प्रदर्शनकारियों ने ‘काम का हक हुआ खत्म, नया रोजगार कानून मजदूरों के साथ धोखा’ जैसे नारे लगाए। संगठन का कहना है कि सरकार की मर्जी से नहीं, बल्कि रोजगार की गारंटी से ही बेकाबू हो चुका पलायन रुकेगा। आदिवासियों के साथ ‘धोखा और गद्दारी’ संगठन के पदाधिकारियों हरसिंग जमरे और नासरी बाई ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार का ‘विकसित भारत जी राम जी कानून’ देशभर के गरीब मजदूरों और आदिवासियों के साथ ‘धोखा और गद्दारी’ है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून गांवों में रोजगार और पलायन पर रोक लगने की संभावना को ही खत्म कर देगा, जिससे भारत के किसान और मजदूर उजड़ेंगे। पदाधिकारियों ने बताया कि 20 साल पहले मजदूरों ने पलायन रोकने के लिए रोजगार गारंटी कानून के लिए संघर्ष किया था। उस कानून में ग्रामसभा की योजना के अनुसार रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी, जिससे शुरू में पलायन काफी हद तक थमा और ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधन विकसित हुए। हालांकि, पिछले 10-15 सालों में रोजगार गारंटी कानून को कमजोर किया गया है। मजदूरी में कटौती होगी संगठन ने यह भी बताया कि नए कानून से मजदूरी दर कम होगी। उनका कहना है कि जहां महंगाई के हिसाब से मजदूरी 600 रुपए प्रतिदिन होनी चाहिए, वहीं इस नए कानून में यह मध्य प्रदेश के न्यूनतम सरकारी मजदूरी रेट 467 रुपए प्रतिदिन से भी कम होगी। पहले नरेगा में मजदूरों की मांग पर काम खोलने का प्रावधान था, जिसे अब छीन लिया गया है। अब सरकारी अधिकारी ही तय करेंगे कि कौन-सा काम, कब और कहां खुलेगा।


