जनवरी के शुरुआती 10 दिन रहे ठंडे:आज से बादलों के साथ बढ़ेगा पारा… फिर मकर संक्रांति से तेज ठंड का एक और दौर

शुक्रवार को जनवरी के 10 दिन बीत गए। इस दौरान तेज ठंड का दौर रहा। अब अगले 10 दिन में मौसम दो रंग दिखाएगा। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो शनिवार से बादल छाने की संभावना है। इस वजह से रात के तापमान में इजाफा हो सकता है, लेकिन इससे दिन के तापमान में गिरावट होगी। 14 जनवरी को पड़ रही मकर संक्रांति से कड़ाके की ठंड का एक और दौर शुरू हो सकता है। इधर शहर में रात में ठंड पड़ने का सिलसिला बरकरार है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 7.0 डिग्री दर्ज किया गया। बीते 24 घंटे में न्यूनतम तापमान में 2 डिग्री का इजाफा हुआ। इसके बावजूद यह सामान्य से 3.4 डिग्री कम रहा। रात में ठंडी हवा चलने का असर सुबह 10:00 बजे तक रहा। दिन का तापमान भी एक डिग्री बढ़ा…
शुक्रवार को दिन का तापमान 25.8 डिग्री दर्ज किया गया। गुरुवार के मुकाबले इसमें एक डिग्री की बढ़ोतरी हुई। दिन में अच्छी धूप भी निकल गई थी। इस कारण तेज ठंड से राहत रही। गुरुवार को दिन का पारा 24.8 डिग्री दर्ज किया गया था। सीजन के 70 दिन बीते, 50 दिन पड़ी तेज ठंड: शुक्रवार को मानसून सीजन के 70 दिन बीत गए। इन 70 दिनों में 50 दिन तेज ठंड पड़ी। इन 50 दिनों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहा। ये 2 मौसमी सिस्टम बरसाएंगे मावठा
मौसम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि पूर्वी और पश्चिम दो विपरीत दिशाओं की हवा आपस में टकराएंगी। इनके कारण नमी आएगी। यही नमी भोपाल में बादल और आसपास कई शहरों में मावठे के रूप में बरसेगी। इस वजह से शनिवार और रविवार को शहर में बादल छाने का अनुमान है। दूसरी तरफ उत्तर भारत में पहुंचा वेस्टर्न डिस्टरबेंस वहां से क्रॉस होगा। यही 14 जनवरी से ठंड का दौर भी लाएगा। भास्कर एक्सपर्ट वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की दोगुनी फ्रीक्वेंसी से ठंड ज्यादा बढ़ी मौसम विशेषज्ञ डॉ. जीडी मिश्रा ने बताया कि हमारे यहां तेज ठंड पड़ने के लिए देश के उत्तरी हिस्से में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का पहुंचना जरूरी है। इससे पहाड़ों पर बर्फबारी होती है। पहाड़ों पर बर्फ पिघलने के बाद हमारे यहां उत्तर से सर्द और बर्फीली हवा आती है। इस बार वेस्टर्न डिस्टरबेंस की फ्रीक्वेंसी दोगुनी बनी हुई है। सामान्य तौर पर यह 6 दिन में एक बार आते हैं लेकिन इस बार इनकी अवधि अब तक औसत 3 दिन रही है। नवंबर और दिसंबर में 12.5 किमी ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम सक्रिय रही। इसने ठंड की अवधि और तीव्रता बढ़ाई।

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