ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले आएगी नई पॉलिसी:अब एमएसएमई में प्रोत्साहन सब्सिडी 700 से बढ़कर 1100 करोड़ रुपए हुई

प्रदेश सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर समिट से पहले एमएसएमई की नई पॉलिसी के साथ ही भूमि आवंटन नियम और प्रोत्साहन की नई पॉलिसी लाने जा रही है। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में स्थानीय उद्यमों के विकास, विदेशी निवेशकों को प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए आकर्षित करना और रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना है। इसी पॉलिसी में एमएसएमई के क्षेत्र में प्रोत्साहन सब्सिडी 700 से 1100 करोड़ रुपए की जा रही है। दो दिन पहले उद्योग मंत्री ने अलग-अलग व्यापारिक संघों से इस संबंध में बातचीत की और वर्तमान पॉलिसी में सुधार के लिए सुझाव भी मांगे थे। मिली जानकारी के मुताबिक सरकार नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और निर्यात संवर्धन पर मजबूत पहल करने जा रही है। मीटिंग में मंत्री ने यह भी कहा कि एमएसएमई में प्रोत्साहन के लिए और भी अधिक पारदर्शी नीति बनाई जाएगी और स्टार्ट-अप के साथ क्लस्टर के विकास का नया ईको-सिस्टम बनेगा। यह नव उद्यमियों, अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं की इकाइयों के लिए मददगार होगा। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार काम करेगी, अगले सप्ताह होगी बड़ी कार्यशाला उद्योग विभाग के अफसरों के मुताबिक अगले सप्ताह निर्यात बढ़ाने के लिए बड़ी कार्यशाला होगी। जिला स्तर पर स्थापित निवेश सेंटर, वन स्टॉप सेंटर के रूप में उद्योगपतियों से निरंतर संवाद किया जा रहा है। इसे और बढ़ाया जाएगा। कलेक्टर्स इस समिति को लीड करेंगे। एमएसएमई की प्रोत्साहन सब्सिडी को बढ़ाकर 700 से 1100 करोड़ रुपए कर दिया है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ट्रांसपोर्ट अनुदान, नवीकरणीय ऊर्जा मुख्यत: सोलर प्लांट को सहायता, जेड प्रमाणन को बढ़ावा देने, इंडस्ट्रियल अवशिष्ट के लिए सहायता एवं टेस्टिंग लैब को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार काम करेगी। विभिन्न संगठनों व उद्योगों की सरकार से मांग विभिन्न संगठनों और औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने सरकार से अपेक्षा की है कि दोहरे कराधान को समाप्त किया जाए। भूखंड हस्तांतरण नीति को सरल किया जाए। महिला उद्यमियों द्वारा संचालित व्यवसायों को अधोसंरचना प्रदान करने, बड़े शहरों के साथ सभी जिलों में एमएसएमई के लिए नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर काम किया जाएगा। साथ ही बड़े शहरों में बहुमंजिला औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण तथा वर्तमान उद्योगों की उत्पादन लागत कम करने गुणवत्ता बढ़ाने नई तकनीक एवं के प्रयोग एवं आधुनिकीकरण पर अतिरिक्त अनुदान प्रदान करने जैसे सुझाव भी दिए गए।

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