सुपोषित जीवन अभियान के तहत जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिला कार्यालय के सभाकक्ष में पोषण सखियों की कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने इस अभियान को जिले से कुपोषण समाप्त करने की दिशा में एक अहम कदम बताया। कलेक्टर ने पोषण सखियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी सतर्कता के साथ कुपोषित बच्चों की शीघ्र पहचान करें। उन्होंने बच्चों की आयु और वजन से जुड़ी सही जानकारी समय पर संबंधित विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि जरूरतमंद बच्चों तक त्वरित मदद पहुंचाई जा सके। साथ ही उन्होंने परिवारों को बच्चों के समुचित पोषण के लिए निर्धारित आहार चार्ट का पालन करने के लिए लगातार प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया। महिलाओं के स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या आम है, जिसका सीधा असर मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसे रोकने के लिए उन्होंने पोषण सखियों से महिलाओं और किशोरियों को पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने तथा रोजमर्रा के भोजन में मिलेट्स को शामिल करने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। कार्यशाला के दौरान पिरामल फाउंडेशन के जिला लीड प्रदीप राव ने सुपोषित जीवन अभियान की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य कुपोषण मुक्त ग्राम पंचायतों का निर्माण और समुदाय स्तर पर पोषण से जुड़े सकारात्मक व्यवहार में बदलाव लाना है।


