बिहार में लघु मध्यम एवं कुटीर उद्योग (एमएसएमई) में निबंधन कराने की रफ्तार झारखंड से काफी तेज हो गई है। 5 साल पहले झारखंड की तुलना में बिहार में निबंधन की रफ्तार करीब दोगुनी थी, जो अब बढ़ कर करीब साढ़े तीन गुनी हो गई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में झारखंड में 42,675 एमएसएमई निबंधित हुए थे, जबकि बिहार में निबंधन का आंकड़ा 89,388 था। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार में जहां 11 लाख 28 हजार 025 निबंधन दर्ज हुए, वहीं झारखंड में यह 3 लाख 74 हजार 612 ही हुआ था। चालू वित्तीय वर्ष में 30 नवंबर तक बिहार में एमएसएमई के लिए 4 लाख 79 हजार 446 निबंधन हुए हैं। झारखंड में निबंधन का यह आंकड़ा 1 लाख 79 हजार 840 पहुंचा है। झारखंड में 14 लाख से अधिक एमएसएमई इकाई
झारखंड में दो साल पहले राज्य में एमएसएमई इकाईयों की संख्या 3.76 लाख थी। यह बढ़कर 14 लाख का आंकड़ा पार कर चुका है। मार्च 2025 में यह संख्या 12 लाख दर्ज की गई थी। अभी केंद्र सरकार ने रैंप योजना के तहत प्रोजेक्ट स्थापना की मॉनिटरिंग इत्यादि के लिए 70 को रुपए की राशि उपलब्ध कराई है। चालू वर्ष में इस क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। जिलों में उद्यम कैंप चल रहा है। एमएसएमई क्षेत्र में पहले करीब 18 लाख लोग रोजगार से जुड़े थे। अब करीब 47 लाख लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। राज्य के जीएसडीपी में औसतन 8.8% की वार्षिक वृद्धि
एमएसएमई क्षेत्र में झारखंड को राष्ट्रीय आंकड़ों के छूने में अभी और समय लगेंगे। दो साल के पहले माइक्रो और लघु उद्योगों की संख्या में 34 हजार की गिरावट देखी गई है, जबकि मध्यम उद्योगों की संख्या में कई हजार की वृद्धि हुई है। झारखंड के जीएसडीपी में औसतन 8.8% वार्षिक वृद्धि हुई है। झारखंड इकॉनोमी सर्वे 2024‑25 के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष 2025‑26 में जीएसडीपी स्थिर मूल्य पर 6.7% से बढ़ कर 7.5% होने की उम्मीद है। एमएसएमई निबंधन ये भी जानें


