सिग्नलों के पास ही सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण चौक-चौराहों पर पिछले एक वर्ष से जेब्रा क्रासिंग बनाए नहीं गए हैं। सिग्नल आफ होने पर लोग सड़क पार करते हैं और वाहन चालक इन्हें टक्कर मार रहे हैं। इसके साथ ही मुख्य मार्ग के किनारे 10 से अधिक स्कूल संचालित हैं। स्कूली बच्चे भी खतरों के बीच सड़क पार कर स्कूल जा रहे हैं। यहां भी संकेतिक बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं। स्कूलों के पास भी संकेतक लगाने के नियम होने की जानकारी से जिले में पदस्थ पुलिस, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के अधिकारी अनजान हैं।तभी तो स्कूलों के आसपास किसी प्रकार के संकेत सूचक नहीं है और न ही जेब्रा क्रासिंग बनाए गए हैं। इसके चलते स्कूली बच्चों को तेज रफ्तार वाहनों से हमेशा खतरा बना रहता है। सड़क किनारे स्थित स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी रोजाना पैदल व साइकिल से स्कूल आना जाना करते हैं। सिग्नलों के पास से रोजाना सड़क क्रास कर स्कूल पहुंचते हैं। वहीं नेशनल हाइवे-353 में भारी संख्या में वाहन गुजरते रहते है। बिना जेब्रा क्रासिंग के ही वाहनों के बीच जान जोखिम में डाल विद्यार्थी स्कूल आ जा रहे हैं। नगर में मुख्य सिग्नलों में से बरोंडा चौक, नेहरू चौक, अंबेडकर चौक, कचहरी चौक, पुलिस थाना व नपा के सामने सिग्नलों के पास बनाए गए जेब्रा क्रासिंग एक साल से मिट चुके हैं। इससे सिग्नलों के पास से सड़क क्रास करने वालों को बीच सड़क से ही पार करना पड़ रहा है। स्कूल से छुट्टी के समय बच्चों की भीड़ जब सड़कों पर निकलती है, तब तेज रफ्तार वाहन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इस प्रकार की घटनाएं को रोकने के लिए स्कूलों के बाहर ट्रैफिक संकेतक, जेब्रा क्रॉसिंग और स्पीड ब्रेकर होना जरूरी हैं। नियमानुसार तो स्कूल के दोनों तरफ 20-20 मीटर की दूरी पर इस प्रकार के संकेतक बोर्ड लगाए जाने चाहिए जिस पर लिखा हो की आगे स्कूल है, वाहन धीमे चलाएं, कृपया हॉर्न न बजाएं आदि।


