475 करोड़ के लक्ष्य में 46 प्रतिशत लोन बांटा गया

भास्कर न्यूज | बैकुंठपुर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय परामर्शदात्री समिति की त्रैमासिक बैठक में जिले की बैंकिंग व्यवस्था की लापरवाही सामने आई है। बैठक की अध्यक्षता कर रहीं कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए लक्ष्य पूरा न करने वाले प्रबंधकों को आड़े हाथों लिया। आंकड़ों ने साफ कर दिया कि जिले में जनहित की योजनाएं बैंक प्रबंधकों की उदासीनता के कारण कागजों तक ही सीमित रह गई हैं। जिले का ऋण-जमा अनुपात मात्र 36.53% है, जबकि मानक स्तर कम से कम 40% होना चाहिए। यह दर्शाता है कि बैंक जनता से पैसा जमा तो कर रहे हैं, लेकिन जिले के विकास के लिए ऋण वितरण में कंजूसी बरत रहे हैं। वार्षिक ऋण योजना के तहत 475 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल 211 करोड़ (मात्र 46%) का ही वितरण हो सका है। आधे से ज्यादा पात्र हितग्राही अब भी लोन के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। शासन द्वारा प्रायोजित ऋण प्रकरण बड़ी संख्या में बैंकों में अटके पड़े हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित मामलों का निपटारा 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने बैंकों की सुस्त कार्यशैली और आपसी समन्वय की कमी को देखते हुए सभी बैंक प्रबंधकों को मार्च 2026 तक का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में वार्षिक ऋण योजना और प्राथमिकता क्षेत्रों (कृषि व कमजोर वर्ग) के लक्ष्य पूरे नहीं हुए, तो इसे बैंक की गंभीर लापरवाही माना जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सेवा केवल कागजों पर ठहरी बैठक में यह भी उजागर हुआ कि जिले के दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बेहद कमजोर है। कलेक्टर ने वित्तीय साक्षरता की कमी पर चिंता जताते हुए अधिक संख्या में बीसी सखी की नियुक्ति करने और नियमित साक्षरता कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए हैं।

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