सांसद खेल महोत्सव के दौरान एकलव्य स्कूल प्राचार्य से विवाद:तीन भाजपा नेताओं को महोत्सव में आने से रोका, अभद्रता का आरोप लगा

छिंदवाड़ा जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, तामिया में आयोजित सांसद खेल महोत्सव के दौरान हुए विवाद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। विद्यालय के प्राचार्य से कथित अभद्रता के मामले में तामिया पुलिस ने तीन भाजपा नेताओं के खिलाफ शांति भंग करने के आरोप में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। वहीं भाजपा नेताओं ने इस कार्रवाई को एकपक्षीय बताते हुए पुलिस को ज्ञापन सौंपा है। पुलिस के मुताबिक, सांसद खेल महोत्सव के शुभारंभ के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर विकासखंड प्रभारी वतन उपाध्याय, कांग्रेस से भाजपा में आए नेता सतीश मिश्रा तथा भाजपा मंडल छिंदी अध्यक्ष व अमरवाड़ा विधायक प्रतिनिधि पवन बंजारा के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। भाजपा का आरोप– बिना सुने की गई कार्रवाई बुधवार, 17 दिसंबर को भाजपा मंडल तामिया ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि पूरे मामले में एकतरफा कार्रवाई की गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सांसद खेल महोत्सव के दौरान विद्यालय प्राचार्य द्वारा आयोजकों का अपमान किया गया, लेकिन पुलिस ने उनका पक्ष सुने बिना ही कार्रवाई कर दी। सरकारी संस्थाओं के भरोसे हुआ आयोजन बताया गया है कि सांसद खेल महोत्सव के आयोजन को लेकर कलेक्टर द्वारा शासकीय संस्थाओं को सहयोग के निर्देश दिए गए थे। अन्य विकासखंडों में जहां आयोजकों ने निजी पंडाल और व्यवस्थाएं की थीं, वहीं तामिया में आयोजन पूरी तरह शासकीय संस्थाओं के भरोसे कराया गया।3 दिसंबर को बीईओ के साथ हुई बैठक में एकलव्य विद्यालय को आयोजन स्थल के रूप में तय किया गया था। प्राचार्य का आरोप– बच्चों के सामने की गई अभद्रता एकलव्य विद्यालय के प्राचार्य राजेश कुशवाहा का आरोप है कि कार्यक्रम से पहले भाजपा नेता सतीश मिश्रा ने बच्चों से कथित तौर पर टेंडर और यूनिफॉर्म को लेकर बातचीत की और इसी दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। विवाद इतना बढ़ गया कि बच्चों के सामने तीखी बहस हुई, जिससे छात्र-छात्राएं सहम गए।प्राचार्य का कहना है कि परीक्षा अवधि का हवाला देकर सीमित बच्चों को ही कार्यक्रम में लाया गया था, लेकिन इसी बात को लेकर विवाद खड़ा किया गया और उन्हें स्थानांतरण की धमकी तक दी गई। दिल्ली तक पहुंची शिकायत, जांच में जुटी पुलिस प्राचार्य ने पूरे मामले की शिकायत जनजातीय कार्य मंत्रालय, दिल्ली में की है। यह शिकायत कलेक्टर कार्यालय होते हुए एसडीएम तक पहुंची, जिसके बाद पुलिस जांच शुरू की गई।इधर भाजपा नेताओं ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामले को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हलचल बनी हुई है।

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