नेताओं के घर में घुसी महिला, पुलिसवालों को नोंचा-काटा:प्रमोशन के लिए दिल्ली गए मंत्री, खाली हाथ लौटे; सांसद ने जिंदा बाबा को दी श्रद्धांजलि

राजधानी में नेताओं के घर में जबरन घुसी एक महिला ने पुलिस को खूब छकाया। बात 6 दिन पुरानी है। ये महिला शहर के​​​​ वीआईपी रेजिडेंशियल एरिया में सेंट्रल पॉलिटिक्स से जुड़े एक बडे़ लीडर के घर में घुस गई। सुरक्षा कर्मियों के रोकने पर भी नहीं रुकी। जिसके बाद पुलिस बुलाई गई। पुलिस पहुंची तो महिला ने दौड़ लगा दी और सीधे विरोधी दल के मुखिया के घर में घुस गई। पीछे-पीछे पुलिस भी पहुंच गई। महिला ने खुद को एक कमरे में कैद कर लिया। चूंकि विरोधी दल के मुखिया घर पर नहीं थे, ऐसे में स्टाफ और पुलिस टेंशन में आ गई। लेडी पुलिस अफसरों ने जैसे-तैसे दरवाजा खोलकर महिला को बाहर निकाला। इस दौरान महिला ने पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। दांतों से काटा, नाखूनों से नोंचा और गालियां भी दीं। नेताओं के घर की सुरक्षा का मामला था, तो पुलिस चुपचाप उसे लेकर चली गई। अब विरोधी दल के वर्कर पूछ रहे हैं कि हमारे मुखिया के घर की सुरक्षा को लेकर पुलिस और सरकार कब गंभीर होगी। हॉस्पिटल में थे बाबा जी, सांसद ने दे दी श्रद्धांजलि
सूबे के निमाड़ अंचल में हाल ही में सबसे बुजुर्ग संत का देवलोकगमन हुआ। वे काफी समय से बीमार थे। प्रशासन ने इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। इसी बीच उनके निधन की खबरें सोशल मीडिया पर चलने लगीं। बाबा जी को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला चल पड़ा। विंध्य क्षेत्र के एक सांसद ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित कर दी। पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं ने ऐसा किया। हालांकि, इन खबरों के बीच बाबा देह त्याग अंतिम सफर पर चले गए। मंत्री जी की दिल्ली दौड़, आखिरकार बेरंग लौटे
प्रमोशन की आस में एक मंत्री दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं। हाल ही में हुए उपचुनाव के रिजल्ट के बाद उनकी उम्मीदें काफी बढ़ गई। वे करीब हफ्तेभर तक दिल्ली में डेरा डाले रहे। दिग्गज नेताओं से मिले। इसी दौरान ‘सरकार’ भी दिल्ली पहुंचे और आला नेताओं से मुलाकात की। उनकी दिल्ली दरबार में हुई मीटिंग में ये साफ हो गया कि मंत्रिमंडल में किसी प्रकार का चेंज नहीं होगा। एडिशनल जिम्मेदारी सरकार के पास ही रहेगी। फिर क्या था, मंत्री बेरंग लौट आए। तीन नेताओं की स्थिति ‘शोले’ के ठाकुर जैसी
फिल्म शोले में ठाकुर का कैरेक्टर तो याद ही होगा। ठाकुर साहब हमेशा कंबल ओढे़ रहते थे। इसलिए नहीं कि उन्हें ठंड ज्यादा लगती थी, बल्कि इसलिए कि उनके हाथ कटे थे। कंबल ओढ़कर वे अपने कटे हाथों को छिपाते थे। सत्ताधारी दल में तीन नेताओं की हालात भी शोले के ठाकुर की तरह ही नजर आ रही है। ये पावरफुल हैं, लेकिन अब पावरलैस हैं। लिहाजा चुप्पी के कंबल से खुद की इज्जत ढंक रखी है। इन्हें फिर से अपने अच्छे दिनों का इंतजार है। पार्टी चलाने के लिए ले रहे मेंटेनेंस अमाउंट
एमपी में थर्ड फ्रंट की एक पॉलिटिकल पार्टी आर्थिक संकट से जूझ रही है। खर्च चलाने के लिए पार्टी अपने पदाधिकारियों से मेंटेनेंस चार्ज ले रही है। हर महीने होने वाली बैठकों में हर जिले के अध्यक्ष और दूसरे पदाधिकारियों से पैसा जमा कराया जा रहा है। विधानसभा वार करीब 2500 रुपए की मेंटेनेंस राशि जमा कराकर जैसे-तैसे पार्टी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कुछ छापना मत, कलेक्टरी मिल सकती है
सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले प्रदेश के एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी इन दिनों किसी भी तरह के विवाद से बचकर रहना चाह रहे हैं। इसकी वजह इनको नए साल में कलेक्टरी मिलने की उम्मीद है। इसके लिए वे प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया से मिल भी चुके हैं और काफी हद तक आश्वस्त भी हैं कि नए फेरबदल में उन्हें कलेक्टरी मिल सकती है। ब्राह्मणों को लेकर सोशल मीडिया पर बयान जारी करने वाले इन आईएएस का रिटायरमेंट भी अगले साल ही है। इसलिए वे अपने मीडिया मित्रों से इस समय यह अनुरोध भी करते हैं कि कुछ निगेटिव मत छापना, ताकि किसी तरह के विवाद में न उलझ जाएं। सवा साल का वनवास खत्म होने का इंतजार
वल्लभ भवन के तीसरे भवन (VB-3) के चौथे माले पर बैठने वाले एक आईएएस अधिकारी पिछले सवा साल से परेशान हैं। कभी प्रदेश संगठन के मुखिया के करीबी रहे इन अधिकारी को वर्तमान सरकार ने लूप लाइन में डाल रखा है। जब ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से हटाए गए थे तो यह उम्मीद थी कि किसी अच्छी जगह पर काम करने का मौका मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया था। सरकार के कामों को प्राथमिकता में रखने वाले इस अधिकारी को अब फिर ऐसी नई जिम्मेदारी की तलाश है, जिसमें वे अपनी श्रेष्ठता बता सकें। और अंत में.. आखिर बन ही गए आईएफएस
अखिल भारतीय सेवा में पदोन्नति के मामले में आईएएस और आईपीएस से आगे चल रहे आईएफएस कैडर के अफसरों की डीपीसी आखिरकार पूरी हो गई। पिछले दस महीने में 6 से ज्यादा बार डीपीसी की बैठक टलने के बाद अब केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने नोटिफिकेशन कर दिया है, जिसमें राज्य वन सेवा के 13 अफसरों को भारतीय वन सेवा के अफसरों के रूप में पदोन्नत कर दिया गया है।
ये भी पढ़ें… मंत्री-सांसद को मिलजुल कर काम करने की नसीहत:मामा के तेवर से अफसर परेशान राजनीति की रेस में आगे निकलने के लिए नेताओं में तगड़ा कॉम्पिटिशन रहता है। नेता चाहे अपने दल के हो या विरोधी दल के, उनके बीच शह-मात का खेल चलता रहता है। सूबे के एक मंत्री और सांसद के बीच भी कुछ ऐसा ही खेल चल रहा है। मामला राजधानी से लगे एक जिले का है। जहां हाल ही में ‘पुराने सरकार’ ने रिव्यू मीटिंग ली थी। पढ़ें पूरी खबर… फिफ्टी-फिफ्टी डील और अध्यक्ष का इस्तीफा:प्रशासनिक मुखिया की बैठकों से अफसर परेशान सत्ताधारी दल के एक विधायक इन दिनों सुर्खियों में हैं। वे एक स्थानीय मुद्दे को लेकर पुलिस और प्रशासन के सामने आ गए हैं। अपनी जिद पर इस कदर अड़े हैं कि कई घंटों तक उन्हें नजरबंद तक रखना पड़ा। अब इन सब के पीछे विधायक जी का असल एजेंडा क्या है?, उनकी मंशा क्या? विधायक के अपने दल के नेताओं के साथ ही विरोधी भी इसी खोज में जुटे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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